कुशीनगर पहुंचकर थाईलैंड की महारानी Sininatha Bilasakalyani ने चढ़ाया चीवर
Kushinagar News: थाईलैंड की महारानी सिनीनाथा बिलासाकल्याणी (Sininatha Bilasakalyan) की कुशीनगर यात्रा ने बौद्ध आस्था और भारत थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। महारानी ने Sininatha Bilasakalyan कुशीनगर पहुंचकर भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की और चीवर चढ़ाया। इस दौरान उनके साथ थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री बोर्नवॉर्नसाक भी मौजूद रहे। महारानी की इस आध्यात्मिक यात्रा को दोनों देशों के ऐतिहासिक और राजनयिक रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
महापरिनिर्वाण मंदिर में विशेष पूजा अर्चना
कुशीनगर स्थित भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण मंदिर में महारानी सिनीनाथा बिलासाकल्याणी (Sininatha Bilasakalyan) ने विधिवत पूजा की। उन्होंने भगवान बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा पर चीवर अर्पित किया और शांत भाव से ध्यान किया। इस अवसर पर थाईलैंड से आए बौद्ध अनुयायी और भिक्षु भी विशेष पूजा में शामिल हुए। पूरे परिसर में धार्मिक आस्था और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
महापरिनिर्वाण मंदिर में पूजा के बाद महारानी Sininatha Bilasakalyan तथागत बुद्ध के अंतिम संस्कार स्थल मुकुट बंधन चैत्य पहुंचीं। यहां उन्होंने परिक्रमा कर पूजा अर्चना की और भगवान बुद्ध को नमन किया। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। यूपी पुलिस के साथ थाईलैंड की सुरक्षा एजेंसियां भी तैनात रहीं ताकि महारानी की यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
10 दिवसीय यात्रा पर हैं Sininatha Bilasakalyan
महारानी सिनीनाथा बिलासाकल्याणी (Sininatha Bilasakalyan) भारत की 10 दिवसीय यात्रा पर हैं। जानकारी के अनुसार वह 21 जनवरी को भारत पहुंची थीं और इस दौरान गया, वाराणसी और कुशीनगर का दौरा कर चुकी हैं। बताया गया कि 28 जनवरी की शाम वह कुशीनगर स्थित थाई मंदिर पहुंचीं, जहां जिला प्रशासन और स्थानीय बौद्ध भिक्षुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। कुशीनगर के बाद महारानी लुंबिनी जाएंगी और 30 जनवरी को थाईलैंड वापस लौटेंगी।
वहीं थाई मंदिर के पीआरओ अंबिकेश त्रिपाठी के अनुसार महारानी Sininatha Bilasakalyan कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सीधे थाई मॉनेस्ट्री पहुंचीं। यहां उन्होंने विधिवत पूजा पाठ किया और छतरी चढ़ाई। इसके साथ ही महारानी ने मॉनेस्ट्री में स्थापित थाईलैंड के राजा नौवें राम भूमिबोल अदुल्यदेज की प्रतिमा की भी पूजा की। इस धार्मिक अनुष्ठान के जरिए थाईलैंड की परंपरा और श्रद्धा को भी सम्मान दिया गया।

