2027 की जंग से पहले ‘वोटर लिस्ट’ पर संग्राम, अखिलेश यादव ने खोला ‘फॉर्म-7’ का कच्चा चिट्ठा
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट अभी से तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर ‘वोटर लिस्ट’ के जरिए लोकतंत्र की हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने आंकड़ों के साथ बताया कि कैसे ‘फॉर्म-7’ का दुरुपयोग कर विपक्षी समर्थकों के वोट काटे जा रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोमवार को प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा 2027 के चुनाव में अपनी निश्चित हार को देखते हुए घबरा गई है और अब साजिश के तहत मतदाता सूची से समाजवादी पार्टी के समर्थकों और ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के वोट कटवा रही है।

‘फॉर्म-7’ के जरिए वोट काटने की साजिश का खुलासा
अखिलेश यादव ने तकनीकी रूप से ‘फॉर्म-7’ के खेल को समझाते हुए कहा कि भाजपा ने एक नया फर्जीवाड़ा शुरू किया है। नियम के मुताबिक, फॉर्म-7 का इस्तेमाल किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने के लिए किया जाता है (जैसे मृत्यु या स्थान परिवर्तन की स्थिति में)। अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा अज्ञात लोगों के जरिए लाखों की संख्या में फर्जी फॉर्म-7 भरवा रही है ताकि सपा समर्थकों के नाम काटे जा सकें।
आंकड़ों की जुबानी अखिलेश का वार
भाजपा द्वारा भरे गए फॉर्म: 1728
अज्ञात नाम से भरे गए फॉर्म: 1,28,659 (सबसे बड़ा संदेह यहीं है)
सपा द्वारा भरे गए फॉर्म: केवल 47
अखिलेश ने सवाल उठाया कि ये ‘अज्ञात’ लोग कौन हैं? उन्होंने कहा, “जब निर्वाचन आयोग ने एस.आई.आर. (SIR) की प्रक्रिया शुरू की थी, तब कहा था कि बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। फिर अचानक अज्ञात लोगों को नाम कटवाने की छूट क्यों दे दी गई?”

नाम कटवाने के लिए फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों का खेल
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई विधानसभा क्षेत्रों के उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह जालसाजी हो रही है।
सकलडीहा: यहां गोविन्द राय के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 16 मतदाताओं के नाम काटने का फॉर्म भरा गया।
बाबागंज: यहां रामदेव सिंह के फर्जी हस्ताक्षर से 65 मतदाताओं के नाम कटवा दिए गए।
भोजीपुरा: यहां सपा के बीएलए (BLA) अतीक अहमद का ही वोट फॉर्म-7 भरकर कटवा दिया गया।
कन्नौज: अखिलेश ने आरोप लगाया कि कन्नौज में भाजपा ने एक ‘सीक्रेट मीटिंग’ की थी जिसमें सपा के वोट काटने की रणनीति बनी। उन्होंने वहां के जिलाधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाए।
बलिया: सिकंदरपुर में सपा विधायक रिजवी की पत्नी का वोट भी लिस्ट से गायब कर दिया गया।
‘लॉजिकल डिस्क्रिपन्सी’ और नोटिस का नया खेल
अखिलेश यादव ने मेरठ के एक वीडियो और अन्य जिलों का जिक्र करते हुए कहा कि जब फॉर्म-7 से बात नहीं बनी, तो अब ‘लॉजिकल डिस्क्रिपन्सी’ (तार्किक विसंगति) के नाम पर पीडीए मतदाताओं को थोक में नोटिस भेजे जा रहे हैं।
मनोज पारस (विधायक): उनके क्षेत्र में 37 हजार नोटिस।
डॉ. मुकेश वर्मा (विधायक): उनके क्षेत्र में 75 हजार नोटिस।
पवन पाण्डेय (अयोध्या): यहां 96 हजार लोगों को नोटिस भेजे गए हैं। फैजाबाद के एक बूथ के डेटा का हवाला देते हुए पवन पाण्डेय ने बताया कि 181 नोटिसों में से 76% पीडीए वर्ग के गरीब मजदूर और किसान हैं।
‘चुनाव आयोग अपनी बिल्डिंग पर भाजपा का झंडा लगा ले’
सपा अध्यक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “हम बार-बार शिकायत कर रहे हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। अगर एक भी पक्षपाती जिलाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हो जाए, तो पूरी व्यवस्था ठीक हो जाएगी। अगर आयोग कार्रवाई नहीं कर सकता, तो उसे अपनी बिल्डिंग पर भाजपा का झंडा लगा लेना चाहिए।”
अखिलेश ने घोषणा की कि सपा के सभी विधायक इस मामले को लेकर चुनाव आयोग को ज्ञापन देंगे और विधानसभा के आगामी सत्र में भी इस मुद्दे को पूरी मजबूती से उठाएंगे। उनकी मांग है कि नाम हटाने की प्रक्रिया केवल सरकारी बीएलओ द्वारा की जाए और फॉर्म-7 भरने वालों का डेटा सार्वजनिक किया जाए।
महंगाई और बेरोजगारी से ध्यान भटकाने की कोशिश
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा जनता को इन तकनीकी उलझनों में इसलिए फंसा रही है ताकि लोग महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर सवाल न पूछें। उन्होंने अमेरिका के साथ हुई हालिया ‘एग्रीकल्चर डील’ का जिक्र करते हुए कहा कि इससे भारतीय किसानों का बाजार विदेशियों के हाथों में चला जाएगा। सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों और 50 लाख करोड़ के फर्जी एमओयू (MoU) पर भी उन्होंने सरकार को घेरा।
अखिलेश यादव का यह आक्रामक अंदाज साफ संकेत दे रहा है कि 2027 का चुनाव केवल रैलियों और भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ‘वोटर लिस्ट’ और ‘बूथ प्रबंधन’ पर भी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ी जाएगी। समाजवादी पार्टी अब गांव-गांव जाकर मतदाताओं को जागरूक करेगी कि वे अपना वोट कटने से बचाएं।
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