‘अखिलेश नफरत का सौदा नहीं करते…’, सपा कार्यालय के बाहर लगा पोस्टर, BJP पर साधा निशाना

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पत्नी व कन्नौज से सांसद डिंपल यादव द्वारा संसद भवन परिसर में बनी मस्जिद में प्रवेश करने पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। इस मुद्दे पर भाजपा नेताओं ने अलग-अलग मंचों से तीखी टिप्पणियां कीं, जिससे राजनीतिक तापमान और चढ़ गया।

इस घटनाक्रम ने राजधानी लखनऊ में पहले से चल रहे पोस्टर युद्ध को और तेज कर दिया है। भाजपा कार्यकर्ता जगह-जगह अखिलेश यादव की तस्वीरों के साथ उनकी पूर्ववर्ती सरकार को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगा रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी भी पलटवार में कोई कसर नहीं छोड़ रही।

इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा नेता मोहम्मद इखलाक ने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने एक पोस्टर जारी करते हुए लिखा, “अखिलेश नफरत की राजनीति नहीं करते, ना ही मंदिर और मस्जिद को सियासी मुद्दा बनाते हैं। हमारे लिए मंदिर और मस्जिद, मोहब्बत की पहचान हैं।”

मोहम्मद इखलाक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, “प्रदेश की योगी सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर घबराई हुई है। इसलिए अब मंदिर और मस्जिद के नाम पर जनता को भ्रमित करने और जातीय ध्रुवीकरण की कोशिशें की जा रही हैं।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काने का सहारा ले रही है।

पुराना विवाद भी फिर चर्चा में

बता दें कि करीब 8 दिन पहले भी सपा और भाजपा के बीच पोस्टरवार के चलते विवाद गहराया था। उस वक्त भाजपा युवा मोर्चा के नेता अमित त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी के 8 कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि ये कार्यकर्ता सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं।

अमित त्रिपाठी ने हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि सपा कार्यकर्ता उनके घर की रेकी कर रहे हैं और वहां लोगों की भीड़ इकट्ठी कर रहे हैं। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय दंड संहिता (BNS) की धाराएं 352, 351(3), 353(2) और सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया।

संसद परिसर की मस्जिद में अखिलेश और डिंपल यादव के प्रवेश से शुरू हुआ विवाद अब राजनीति के कई मोर्चों तक फैल चुका है पोस्टर से लेकर पुलिसिया कार्रवाई तक। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति को और कितना प्रभावित करेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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