अखिलेश को नसीमुद्दीन में नजर आ रहा आजम का आभासी विकल्प !

मुस्लिम वोटबैंक के खातिर पूर्व मंत्री के दामन पर लगे भ्रष्टाचार के दाग भी सपा मुखिया के लिए मानो अच्छे हैं

Sandesh Wahak Digital Desk: हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिस को भी देखना हो कई बार देखना… प्रख्यात शायर निदा फ़ाज़ली का यह शेर वर्तमान दौर के नेताओं पर सटीक बैठता है। तभी जिस सपा के संस्थापक सदस्य रहे वरिष्ठ नेता आजम खान ने अपने खून पसीने से सींचा, आज उसी पार्टी के कर्णधारों को मानो पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के चेहरे में उनका आभासी विकल्प नजर आ रहा है।

अखिलेश को नसीमुद्दीन में नजर आ रहा आजम का आभासी विकल्प !

दरअसल पूरा खेल मुस्लिम वोटबैंक का है। जिसे पाने की ख्वाहिश में सपा मुखिया अखिलेश यादव की छटपटाहट देखते ही बनती है। तभी नसीमुद्दीन के दामन पर लगे भ्रष्टाचार के दाग भी उन्हें मानो अच्छे लगने लगे हैं। मिशन 2027 के नजरिये से सियासी दलबदल का खेल सपा को कितना लाभ पहुंचाएगा। यह फिलहाल समय के गर्भ में है।

सियासी विश्लेषकों के मुताबिक सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को अपने चुनावी दांव पीडीए के खातिर बसपा- कांग्रेस की सवारी कर चुके पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी की खासी दरकार है। लेकिन बसपा शासन में 18 विभागों के मुखिया मिनी सीएम की हैसियत वाले नसीमुद्दीन की छवि आजम के आगे एक इंच भी नहीं ठहरती है। ऐसा खुद सपा के पुराने सिपहसालार भी मानते हैं। आजम के विकल्प के तौर पर नसीमुद्दीन के पहले भी अखिलेश ने कई मुस्लिम नेताओं से करीबियां बढ़ाईं तो जरूर, लेकिन मुस्लिमों ने खुद इस सियासी दांवपेंच को भांपते हुए अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में साइकिल को पंचर करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर हैं भ्रष्टाचार के कई आरोप

पुराने सपाइयों के मुताबिक आजम के ऊपर भले योगी सरकार ने एक सैकड़ा मुकदमें सियासी दुर्भावना वश लाद दिए। लेकिन आजम के सियासी जीवन पर एक भी घोटाले व भ्रष्टाचार का आरोप आज तक नहीं लगा है। वहीं पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी आय से अधिक सम्पत्ति से लेकर स्मारक घोटाले जैसे भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में लम्बे समय से फंसे हैं। बांदा और बाराबंकी में करोड़ों के निवेश और कीमती जमीनें खरीदने के आरोप भी नए नहीं हैं। तभी पूर्व लोकायुक्त ने सिद्दीकी के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। विजिलेंस जांच में तेजी लाती तो नसीमुद्दीन की गिरफ्तारी तय थी। बुंदेलखंड पैकेज में भी धांधलियों के आरोप पुराने हैं।

हालांकि आजम की मुस्लिम वोटबैंक के बीच लोकप्रियता उसी समय दिख गयी थी। जब जेल से बाहर आने पर आजम का एक-एक कदम सुर्खियां बटोर रहा था। नतीजतन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी आजम से मिलने उन्ही की चौखट पर दस्तक देनी पड़ी। वो बात इलग है कि सीतापुर जेल में बंद आजम को अखिलेश ने एक तरह से अकेला ही छोड़ रखा था। फिलहाल आजम का विकल्प नसीमुद्दीन साबित होंगे या नहीं, यह तो नहीं पता, लेकिन उनके पार्टी में आने के बाद बुंदेलखंड समेत पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोटों को लेकर अखिलेश का भ्रम मिशन 2027 में जरूर टूटने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

फूलबाबू का नारा था नसीमुद्दीन हटाओ बसपा बचाओ, लगाए थे वसूली के आरोप

2015 में बसपा से निष्कासित होने के बाद पूर्व विधायक अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू ने बरेली में प्रेस कांफ्रेंस में नसीमुद्दीन पर धन वसूली के संगीन आरोप लगाए थे। कहा था कि सिद्दीकी ने बसपा हाईजैक कर गुलामी प्रथा लागू की है। सिद्दीकी के कोआर्डिनेटर बनते ही विधान सभा प्रत्याशी बनाने की बोली लगने लगी है। उनसे भी डेढ़ करोड़ मांगे, नहीं देने पर पार्टी से निकाल दिया। सिद्दीकी ने कद्दावर मुस्लिम नेता बसपा से बाहर करा दिए। जिला पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद को एक करोड़, प्रमुखी को 50 लाख मांगने का आरोप लगाया। मुस्लिम विरोधी सिद्दीकी से दूरी बनाने का आह्वान किया। नसीमुद्दीन हटाओ, बसपा बचाओ का नारा भी दिया। अब इसे संयोग कहें या फूलबाबू की बदकिस्मती कि आज उन्ही के साथ सपा का दामन थामना पड़ रहा है।

नसीमुद्दीन की नजर में आरएसएस एजेंट थे मुलायम, अखिलेश को भी नहीं बख्शा

नसीमुद्दीन भले सपा की शान में कसीदे पढ़ रहे है। लेकिन एक दौर ऐसा रहा है, जब उन्होंने सपा संस्थापक दिवंगत धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव को आरएसएस का एजेंट करार दिया था। वहीं शामली में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव को गोधरा कांड से भी बड़ा मुजफ्फरनगर दंगा कराने वाला कहने से गुरेज नहीं किया था। शामली के थानाभवन में मुलायम को धोती के नीचे आरएसएस का कच्छा पहनने वाला नेता भी बताया। संभल के बहजोई में बसपा के भाईचारा सम्मेलन के दौरान 20 अक्टूबर 2016 को नसीमुद्दीन ने मुलायम को मोदी से भी खतरनाक कहा था। इसी माह एक साक्षात्कार में मुलायम को बाबरी विध्वस का जिम्मेदार बताया। सपा शासन को गुंडों की सरकार बोलने वाले नसीमुद्दीन आज अखिलेश की तारीफों के पुल बांध रहे हैं। इसे हास्यापद ही कहा जाएगा।

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