अखिलेश का योगी सरकार पर निशाना, ‘क्या जनता से आंख मिलाकर कुछ कहना चाहेंगे?’
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में एक मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर (मूक-बधिर) युवती से हुए जघन्य रेप मामले ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित अन्य विपक्षी दलों ने योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि यह घटना राज्य में कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति को दर्शाती है।
अखिलेश यादव ने उठाए कानून-व्यवस्था पर सवाल
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए योगी सरकार से सवाल किया। उन्होंने लिखा, “बलरामपुर में एक दिव्यांग के साथ दुष्कर्म की गंभीर घटना सामने आई है। कानून-व्यवस्था का दावा करनेवाले इस मामले में जनता से आंख मिलाकर कुछ कहना चाहेंगे?” उन्होंने सरकार से यह भी मांग की कि पीड़िता को हरसंभव राहत, सहायता और चिकित्सा सुविधा तुरंत उपलब्ध कराई जाए। सपा प्रमुख ने सरकार से अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा देने और ‘एनकाउंटर का दिखावा न करने’ की भी अपील की।
कांग्रेस और ‘आप’ का भी योगी सरकार पर हमला
इस मामले में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) ने भी योगी सरकार को घेरा है। कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि आरोपियों ने सामूहिक बलात्कार के बाद पीड़िता को पुलिस चौकी से महज 20 मीटर की दूरी पर बेहोशी की हालत में छोड़ दिया। उन्होंने दावा किया कि एसपी आवास के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि पीड़िता खुद को बचाने के लिए भाग रही थी, जबकि 5-6 लोग बाइक पर उसका पीछा कर रहे थे।
आम आदमी पार्टी ने भी इस घटना को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की। ‘आप’ ने आरोप लगाया कि यह घटना दर्शाती है कि योगी आदित्यनाथ के शासन में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। पार्टी ने कहा कि पीड़िता आरोपियों से भागते हुए पुलिस अधीक्षक आवास के पास से गुजरी, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिली। ‘आप’ ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं और बच्चियों के साथ लगातार अपराध हो रहे हैं, लेकिन सरकार और पुलिस को इसकी कोई परवाह नहीं है।
पुलिस ने दो संदिग्धों को किया गिरफ्तार
यह राजनीतिक बवाल ऐसे समय में हो रहा है, जब बलरामपुर पुलिस ने कथित बलात्कार की घटना के दो दिन बाद तड़के एक मुठभेड़ के बाद दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, विपक्षी दल पुलिस की इस कार्रवाई पर भी सवाल उठा रहे हैं और इसे ‘दिखावा’ करार दे रहे हैं।
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