“अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर वार, कहा– डीएम कर रहे खानापूर्ति, एफिडेविट न मिलने की बात झूठ”
Sandesh Wahak Digital Desk: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर चुनाव आयोग और जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। मामला है 2022 विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाता सूची से हजारों नाम काटे जाने का। अखिलेश ने आरोप लगाया कि आयोग का यह दावा पूरी तरह झूठा है कि उन्हें सपा की ओर से कोई हलफनामा (एफिडेविट) नहीं मिला।
“एफिडेविट नहीं मिला तो डीएम जवाब क्यों दे रहे हैं?”
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “डीएम लोगों से जनता का मासूम सवाल है— इतने सालों बाद अचानक जवाब क्यों दिया जा रहा है? जौनपुर, कासगंज और बाराबंकी के जिलाधिकारियों ने हमारे 18,000 शपथपत्रों को लेकर जवाब भेजा है। इससे साफ हो गया कि चुनाव आयोग का दावा कि एफिडेविट मिले ही नहीं— दरअसल झूठ था। अगर एफिडेविट मिले ही नहीं, तो जिलाधिकारी किस बात का जवाब दे रहे हैं?”
डीएम लोगों से जनता का एक मासूम सवाल है, क्यों इतने सालों बाद आया जवाब है?
… जिस तरह कासगंज, बाराबंकी, जौनपुर के DM हमारे 18000 शपथपत्रों के बारे में अचानक अति सक्रिय हो गये हैं, उसने एक बात तो साबित कर दी है कि जो चुनाव आयोग कह रहा था कि ‘एफ़िडेविट की बात गलत है’ मतलब एफ़िडेविट…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 20, 2025
उन्होंने जिला प्रशासन पर खानापूर्ति का आरोप लगाते हुए कहा कि सतही जवाब देने वाले डीएम की संलिप्तता की जांच होनी चाहिए। साथ ही कोर्ट से संज्ञान लेने की मांग भी की। अखिलेश ने बीजेपी सरकार, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन को “चुनावी तीन तिगाड़ा” करार दिया। उन्होंने कहा, “यही त्रिगुट लोकतंत्र पर डाका डालने के लिए जिम्मेदार है। झूठ का गठजोड़ चाहे जितना ताकतवर लगे, लेकिन सच सामने आकर ही रहता है।”सपा प्रमुख ने आगे लिखा कि बेईमान लोग देश, समाज और जनता के साथ हमेशा दगा करते हैं और अंत में अपमानजनक जिंदगी जीने को मजबूर होते हैं।
बहस तेज, जांच की मांग
इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर 2022 चुनावों में मतदाता सूची से नाम काटने का मुद्दा फिर गरम हो गया है। अखिलेश यादव गहन जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन का कहना है कि सभी बदलाव नियमों के तहत और सटीक जानकारी के आधार पर किए गए। अब देखना होगा कि अदालत और आयोग इस तकरार पर क्या कदम उठाते हैं, लेकिन इतना तय है कि मतदाता सूची में धांधली का मुद्दा यूपी की राजनीति में फिर से सियासी तूफान खड़ा कर रहा है।
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