अखिलेश यादव ने बहन-बेटी का जिक्र कर बीजेपी पर बोला हमला, जनता से पूछा- क्या अब भी साम्प्रदायिकता का चश्मा पहनकर देंगे वोट
Lucknow News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक बेहद हमलावर पोस्ट के जरिए भाजपा शासित राज्यों की कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने जनता से भावुक और तार्किक अपील करते हुए पूछा कि क्या वे चारों ओर फैली हताशा और नफरत के बावजूद भाजपा का समर्थन जारी रखेंगे?
अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट की शुरुआत ही बहुत कड़े शब्दों में की। उन्होंने लिखा कि जो लोग भाजपा को आंख बंद करके समर्थन देते हैं, अगर उनमें रत्ती भर भी मानवता और संवेदना बची है, तो वे अपने घर की बहन-बेटियों की तरफ देखने के बाद आईने में खुद से सवाल करें। उन्होंने भाजपा शासित राज्यों को डबल इंजन के बजाय भ्रष्टाचार और अपराध का केंद्र बताया।
सपा प्रमुख ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई घटनाओं को गिनाते हुए सरकार को घेरा।
उत्तर प्रदेश: जहरीले सिरप से हो रही मौतें और जीएसटी अधिकारी के घर से करोड़ों की नकदी मिलने पर ईमानदार टैक्स सिस्टम के दावों पर तंज कसा।
उत्तराखंड: राज्य की बेटी के लिए न्याय की गुहार का मुद्दा उठाया।
मध्य प्रदेश: दलितों पर अत्याचार और बाबा साहेब की तस्वीरें जलाए जाने की निंदा की।
महाराष्ट्र: विपक्षी उम्मीदवारों को डराकर निर्विरोध चुनाव जीतने के संयोग पर सवाल खड़े किए।
दिल्ली: प्रदूषण की मार झेल रही जनता का जिक्र करते हुए कहा कि लोग एक-एक सांस के लिए तरस रहे हैं।
बिहार: शराबबंदी के बावजूद पुलिस के संरक्षण में बिक रही अवैध शराब पर निशाना साधा।
भाजपा को आँख बंद करके समर्थन व वोट देनेवाले अगर रत्ती भर भी देश प्रेम, संवेदना, शर्म, मानवता, विवेक, ज्ञान और चेतना रखते हों तो निम्नलिखित को पढ़कर ख़ुद से सवाल करें और अपनी बहन, बेटियों, परिवार की ओर देखने के बाद आइने में अपनी आँखों से आँखें मिलाएं:
– भाजपाई डबल इंजन के…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 4, 2026
देश की छवि और निवेश को हो रहा नुकसान
अखिलेश यादव ने चेतावनी दी कि साम्प्रदायिक उन्माद और महिलाओं व पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज पर हो रहे अत्याचार देश के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन आंतरिक समस्याओं की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब हो रही है, जिससे निवेश कम हो रहा है और विदेशों में रह रहे भारतीयों को अपमान झेलना पड़ रहा है।
पोस्ट के अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें कुछ और समझ नहीं आ रहा, तो वे कम से कम अपने घर के बेरोजगार युवाओं की हताशा और घटते कारोबार के बारे में सोचें। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक हिंसक और नफरती सामाजिक वातावरण में देश तरक्की कर सकता है?

