‘30 साल की सत्ता का हिसाब दो’, अखिलेश यादव ने पूर्णिया में NDA को घेरा

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को पूर्णिया के धमदाहा में महागठबंधन समर्पित राजद प्रत्याशी संतोष कुशवाहा के लिए जोरदार चुनावी सभा को संबोधित किया। यादव ने अपने भाषण में बीजेपी-एनडीए के 30 साल के शासन (बिहार में 20 और दिल्ली में 10 साल) का हिसाब देने की चुनौती दी और तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की अपील की।

‘1+1=11’: महागठबंधन और बीजेपी पर वार

अखिलेश यादव ने अपनी चुनावी अपील को एक गणितीय समीकरण से जोड़ा। उन्होंने 11 नवंबर को होने वाली वोटिंग का जिक्र करते हुए कहा कि “एक और एक मिलकर 11 होता है। बिहार में महागठबंधन को मजबूत करना है और बीजेपी को ‘नौ दो ग्यारह’ करना है।” उन्होंने धमदाहा की जनता से राजद प्रत्याशी को भारी मतों से जिताने और तेजस्वी यादव को अगला मुख्यमंत्री बनाने की अपील की, ताकि “जंगलराज की वापसी को रोका जा सके।”

यादव ने विकास के आंकड़ों से हटकर आम आदमी की जेब और राशन पर हो रही ‘चोरी’ को मुख्य मुद्दा बनाया। उन्होंने एनडीए पर खाद्य और मुनाफे की चोरी का आरोप लगाया और कहा कि यह चुनाव केवल वोट का नहीं, बल्कि राशन बचाने का चुनाव है। उन्होंने व्यंग्यात्मक ढंग से कहा कि सरकार की मुनाफाखोरी के कारण लोगों की पसंदीदा ‘पारले-जी’ बिस्किट का साइज भी छोटा हो गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि हर चीज में चोरी हो रही है।

उद्योग और किसान

सपा अध्यक्ष ने किसानों के मुद्दे को उठाते हुए उद्योग-धंधे बाहर ले जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए खाद्य, यूरिया, डीजल और सिंचाई यंत्र की कीमतों में कमी करने को जरूरी बताया। यादव ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार ने जानबूझकर उद्योग धंधे बिहार से बाहर लगा दिए, ताकि यहाँ के लोग उसी पैसे से अपने बच्चों को पढ़ा-लिखाकर आगे न बढ़ सकें।

बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

अखिलेश यादव ने अपने भाषण के अंत में बीजेपी पर सत्ता का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी के लिए ‘C टीम’ के रूप में चुनाव आयोग काम कर रहा है। उन्होंने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “दिल्ली में बैठे नेता बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब हम और आप मंदिर जाते हैं, तो बीजेपी वाले बाद में आकर मंदिर धुलवाते हैं, जो उनके भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है।”

 

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