असम विधानसभा चुनाव में ताल ठोकेंगे अखिलेश यादव, 5 सीटों पर सपा की नज़र

Sandesh Wahak Digital Desk: लोकसभा में सीटों के लिहाज से देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी समाजवादी पार्टी (सपा) अब उत्तर प्रदेश की सीमाओं से बाहर विस्तार करने की तैयारी में है। पार्टी ने वर्ष 2026 में होने वाले असम विधानसभा चुनाव में पहली बार अपने प्रत्याशी उतारने का निर्णय लिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का मुख्य लक्ष्य चुनाव आयोग द्वारा ‘राष्ट्रीय पार्टी’ की मान्यता प्राप्त करना है।

सपा की चुनावी रणनीति: असम पर नजर

सूत्रों के अनुसार, सपा असम के मुस्लिम बहुल इलाकों की न्यूनतम 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। पार्टी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद अखिलेश यादव असम में चुनाव प्रचार की कमान संभाल सकते हैं। अन्य राज्यों में वोट प्रतिशत बढ़ाकर राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करना।

क्यों जरूरी है ‘राष्ट्रीय पार्टी’ का दर्जा?

वर्तमान में सपा के पास 37 लोकसभा सांसद हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश तक सीमित है, जिसके कारण चुनाव आयोग ने उन्हें केवल ‘राज्य स्तरीय दल’ की मान्यता दी है। राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए आवश्यक शर्तें:-

कम से कम 4 राज्यों में कुल वैध वोटों का न्यूनतम 6% प्राप्त करना अनिवार्य है।

इसके साथ ही लोकसभा में कम से कम 4 सीटें होनी चाहिए (जो सपा के पास पहले से हैं)।

या फिर कम से कम तीन अलग-अलग राज्यों से लोकसभा की 2% सीटें (11 सीटें) जीती हों।

यूपी के बाहर सपा की वर्तमान स्थिति

सपा का विस्तार वर्तमान में कुछ ही राज्यों तक सीमित है:

महाराष्ट्र: 2 विधायक।

गुजरात: 1 विधायक।

असम में चुनाव लड़कर पार्टी अपने वोट बैंक और भौगोलिक विस्तार को मजबूती देना चाहती है, ताकि वह अखिल भारतीय स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

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