‘कर्मचारियों की जा रही जान’, अखिलेश यादव ने SIR को बताया भाजपा-आयोग की साजिश

Sandesh Wahak Digital Desk: समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और अन्य कर्मचारियों पर जबरदस्ती का कार्यभार (Work Pressure) बनाया जा रहा है, जिसके कारण लोगों की जान जा रही है। उन्होंने एसआईआर को भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत की साजिश करार दिया है।

कर्मचारियों की मौत पर सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने शनिवार को कहा कि भाजपा एसआईआर के लिए अजीब जल्दबाजी दिखा रही है, जबकि इस समय प्रदेश में शादियाँ होने के कारण लोग व्यस्त हैं।

आत्महत्या का आरोप: उन्होंने फतेहपुर दौरे का हवाला देते हुए बताया कि सुपरवाइजर पर सरकारी दबाव बनाया जा रहा था, जिसके चलते उन्होंने आत्महत्या कर ली।

बंगाल का उदाहरण: उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग कह रहे हैं कि चुनाव आयोग के हाथ खून से रंगे हैं।

आर्थिक मदद: सपा प्रमुख ने मलिहाबाद के मृतक बीएलओ विजय कुमार वर्मा की पत्नी संगीता को दो लाख रुपये की आर्थिक मदद भी प्रदान की।

सड़क से संसद तक लड़ाई

अखिलेश यादव ने चेतावनी दी कि एसआईआर के मुद्दे पर सपा संसद के बाद सड़क पर भी उतरेगी। उन्होंने कहा कि फॉर्म भरने के लिए नगर निगम के सफाई कर्मियों को सहायक बनाया जा रहा है, जो अनुचित है।

एक दिन पहले उन्होंने एनडीए के सहयोगी दलों समेत सभी विपक्षी दलों से अपील की थी कि वे एकजुट होकर भाजपा के वोट काटने के षड्यंत्र का पर्दाफाश करें। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि सारे काम छोड़कर एसआईआर की घपलेबाजी को रोकें।

‘लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी’ और पीडीए का मुद्दा

अखिलेश यादव ने एसआईआर को ‘लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी’ बताया और चेतावनी दी कि आज वोट काटा जा रहा है, कल को खेत, जमीन, मकान और आरक्षण से भी नाम काटे जाएंगे।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा को पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के बढ़ते जनाधार का डर सता रहा है, इसीलिए वह एसआईआर का काम शुरू करा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार चुनाव में पीडीए हारा नहीं, उसे हराया गया है।

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