इलाहाबाद हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार, ‘आंकड़े सुधारने और वाहवाही लूटने के लिए न लगाएं गैंगस्टर एक्ट’

Sandesh Wahak Digital Desk: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट के बेजा इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस अपनी ‘पीठ थपथपाने’ या अपनी छवि सुधारने के लिए किसी भी नागरिक पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई नहीं कर सकती। यह कानून सामान्य धाराओं की ‘अपग्रेडेड कॉपी’ नहीं है जिसे हर छोटे-बड़े मामले में लागू कर दिया जाए।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: कानून की मंशा समझें

न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने बस्ती निवासी उस्मान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा गैंगस्टर एक्ट एक अत्यंत कठोर कानून है। इसका प्रयोग केवल ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही होना चाहिए, न कि महज आंकड़ों को बेहतर दिखाने के लिए। गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए एक विस्तृत और अनिवार्य प्रक्रिया तय की गई है, जिसका पालन करना पुलिस के लिए बाध्यकारी है।

क्या था मामला?

मामला बस्ती जिले के पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र का है। याची उस्मान के खिलाफ पुलिस ने उसके पुराने एक मुकदमे को आधार बनाकर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई कर दी थी।

याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जिस पुराने मुकदमे के आधार पर गैंगस्टर लगाया गया, उसमें उस्मान पहले से ही जमानत पर है। पुलिस ने केवल अपनी उपलब्धियां दिखाने और उच्चाधिकारियों की नजर में ‘नंबर’ बढ़ाने के लिए दुर्भावनापूर्ण तरीके से यह कार्रवाई की।

कोर्ट का आदेश और जवाब तलब

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याची उस्मान की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने संबंधित विवेचक और थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। अदालत ने पुलिस को चेतावनी दी है कि गैंगस्टर एक्ट जैसे गंभीर कानून का इस्तेमाल मनमाने ढंग से करना कानून की मंशा के विपरीत है।

 

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