यूपी पुलिस के ‘हाफ एनकाउंटर’ तरीके पर इलाहाबाद High Court की सख्ती, कहा- सजा देना पुलिस का काम नहीं
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश पुलिस के कथित ‘हाफ एनकाउंटर’ तरीके पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि कुछ पुलिस अधिकारी अनावश्यक रूप से गोली चला रहे हैं और इसके पीछे मकसद कानून व्यवस्था नहीं बल्कि तारीफ, समय से पहले प्रमोशन और सोशल मीडिया पर वाहवाही बटोरना होता है। हाईकोर्ट ने इस प्रवृत्ति को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक बताते हुए सख्त चेतावनी जारी की है।
सज़ा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका का
जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की बेंच ने स्पष्ट किया कि एनकाउंटर से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य 2014 की गाइडलाइंस का पालन हर हाल में किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर इन निर्देशों की अनदेखी हुई तो संबंधित जिले के SP, SSP और पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से अवमानना का दोषी माना जाएगा। यह चेतावनी सीधे पुलिस नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराने का संकेत है।
हाईकोर्ट (High Court) ने दो टूक कहा कि आरोपी को सज़ा देना पुलिस का काम नहीं है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां कानून संविधान के अनुसार चलता है न कि किसी अधिकारी की व्यक्तिगत सोच या त्वरित निर्णय के आधार पर। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून अपने हाथ में लेना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
‘हाफ एनकाउंटर’ की प्रवृत्ति पर कड़ा सवाल
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कई मामलों में पुलिस अधिकारी जानबूझकर आरोपी के घुटने के नीचे पैर में गोली मारते हैं ताकि मामला ‘हाफ एनकाउंटर’ कहलाए और उन्हें बहादुरी का श्रेय मिल सके। हाईकोर्ट (High Court) ने इस तरीके को कानून की नजर में पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और कहा कि ऐसी कार्रवाई किसी भी रूप में जायज नहीं ठहराई जा सकती।
दरअसल यह सख्त आदेश शुक्रवार को उस समय आया जब कोर्ट एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। आरोपी को पुलिस एनकाउंटर में गंभीर चोटें आई थीं। कोर्ट ने पाया कि इस कथित मुठभेड़ में किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई थी। ऐसे में हथियार इस्तेमाल करने की आवश्यकता और उसकी अनुपातिकता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
PUCL गाइडलाइंस की अनदेखी पर नाराज़गी
हाईकोर्ट (High Court) ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही एनकाउंटर मामलों के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश तय कर चुका है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में पुलिस बार बार इन नियमों को नजरअंदाज कर रही है। कोर्ट ने साफ कहा कि तारीफ या पुरस्कार पाने के लिए पुलिस को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट (High Court) ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि एनकाउंटर के मामलों में FIR और निष्पक्ष जांच अनिवार्य होगी और जांच ऐसे अधिकारी करेंगे जो एनकाउंटर में शामिल टीम से वरिष्ठ स्तर के हों। घायल आरोपी को तुरंत इलाज दिया जाएगा और फिटनेस के बाद उसका बयान दर्ज किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सक्षम अदालत को भेजी जाएगी और प्रमोशन या गैलेंट्री अवॉर्ड जांच पूरी होने से पहले नहीं दिए जाएंगे।
पीड़ित परिवार को न्याय का अधिकार
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर पीड़ित परिवार को लगता है कि जांच निष्पक्ष नहीं हुई है तो वह सेशंस जज के सामने शिकायत कर सकता है। जरूरत पड़ने पर मामला हाईकोर्ट तक पहुंच सकता है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है।
High Court का अंतिम संदेश
यहां इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) ने साफ कर दिया है कि पुलिस कानून से ऊपर नहीं है। एनकाउंटर किसी भी स्थिति में न्याय का विकल्प नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन सीधे तौर पर अवमानना माना जाएगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे।
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