अमेठी: मुसाफिरखाना में वकीलों की महापंचायत, एसडीएम के खिलाफ खोला मोर्चा
मुसाफिरखाना, अमेठी। मुसाफिरखाना तहसील परिसर गुरुवार को नारों और वकीलों की हुंकार से गूंज उठा। एसडीएम (प्रशासनिक) अभिनव कनौजिया की कार्यप्रणाली से नाराज अधिवक्ताओं ने एक विशाल ‘अधिवक्ता महापंचायत’ का आयोजन किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वेद प्रकाश शुक्ला और महासचिव राजीव तिवारी के नेतृत्व में आयोजित इस पंचायत ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा।
क्यों नाराज हैं वकील?
अधिवक्ताओं का आरोप है कि एसडीएम अभिनव कनौजिया की कार्यशैली जनहित में नहीं है। महापंचायत के दौरान वकीलों ने न केवल उनके तुरंत स्थानांतरण (तबादले) की मांग की, बल्कि उनके खिलाफ ‘आय से अधिक संपत्ति’ की जांच कराकर कड़ी कार्रवाई करने की भी आवाज उठाई। वकीलों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक एसडीएम को यहाँ से हटाया नहीं जाता, वे न्यायिक कार्यों का बहिष्कार जारी रखेंगे।

हाईकोर्ट से लेकर कई जिलों के वकील जुटे
इस महापंचायत की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें अमेठी के अलावा सुल्तानपुर, बाराबंकी और रायबरेली जैसे पड़ोसी जनपदों के वकीलों के साथ-साथ हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने भी हिस्सा लिया। हैदरगढ़, गौरीगंज और अमेठी तहसील के बार एसोसिएशन के दिग्गजों ने मंच से अधिवक्ताओं की एकजुटता का प्रदर्शन किया।

जनता और राजनीतिक दलों का मिला साथ
यह आंदोलन केवल वकीलों तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी विजय पासी हजारों लोगों के साथ समर्थन देने पहुंचे। इसके अलावा किसान संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भी तहसील पहुंचकर वकीलों की मांगों को जायज बताया। वकीलों का कहना है कि यह लड़ाई केवल उनकी नहीं, बल्कि उन आम फरियादियों की भी है जिन्हें तहसील में न्याय नहीं मिल पा रहा।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
महापंचायत के माध्यम से वकीलों ने हुंकार भरी कि प्रशासन उनकी मांगों को हल्के में न ले। यदि एसडीएम का तबादला नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में जिले की न्यायिक व्यवस्था पूरी तरह ठप की जा सकती है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मंच से घोषणा की कि उनका विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक भ्रष्ट और तानाशाही रवैये वाले अधिकारियों पर गाज नहीं गिरती।
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