Lucknow News: KGMU में विवाद के बीच नगर निगम ने थमाया 67 करोड़ का नोटिस

Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में फिलहाल OPD बंदी का निर्णय अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने देर शाम संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद से हुई वार्ता की जरूरी बातें साझा की और कर्मचारियों तथा डॉक्टरों को न्याय मिलने का भरोसा दिलाया। इसके बाद मरीजों के हित में सभी संगठनों ने OPD बंदी का फैसला टाल दिया। इसी बीच लखनऊ नगर निगम ने KGMU को 67 करोड़ रुपये का नोटिस दिया है।

नगर निगम ने 67 करोड़ का थमाया बिल

इससे पहले कुलपति ने प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद से मुलाकात की थी। इस दौरान शुक्रवार को अपर्णा यादव के समर्थकों द्वारा कैंपस में किए गए उपद्रव को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद मंगलवार को KGMU परिसर में पीएससी तैनात कर दी गई। इस पहल के बाद कर्मचारी और डॉक्टर संगठनों में संतोष का माहौल दिखा और OPD बंदी को टालने पर सहमति बन गई।

विवाद के बीच नगर निगम की टीम KGMU पहुंची और 60 भवनों के गृहकर के रूप में 67 करोड़ रुपये का बिल थमा दिया। निगम अधिकारियों का कहना है कि यह बिल लंबे समय से बकाया था और पहले भी KGMU प्रशासन को नोटिस जारी किए जा चुके थे।

STF के हाथ में आई KGMU की जांच

KGMU में कट्टरपंथी गतिविधियों और धर्मांतरण की जांच कर रही फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच सोमवार को स्थगित कर दी गई। अब इस पूरे प्रकरण की जांच STF को सौंप दी गई है। STF की जांच में कई डॉक्टरों के बेनकाब होने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि कैंपस के अंदरखाने में अलग सा माहौल दिखाई देने लगा है।

25 दिसंबर को गठित 5 सदस्यीय जांच टीम ने करीब 20 दिनों में आधा दर्जन से ज्यादा बैठकें की थीं। पैथोलॉजी विभाग के फैकल्टी और स्टाफ के बयान भी दर्ज किए गए थे। जांच के दौरान कमेटी के टॉप एक्सपर्ट और पूर्व पुलिस महानिदेशक भावेश कुमार सिंह ने फैकल्टी मेंबर्स से अकेले में बातचीत की और उनके बयान दर्ज किए। पीड़िता और उसके पिता से भी बातचीत कर घटना की विस्तार से जानकारी ली गई। इसी दौरान फैकल्टी मेंबर्स की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं।

KGMU

STF को सौंपे जाएंगे सभी दस्तावेज

सूत्रों के अनुसार जब पूर्व डीजीपी भावेश कुमार सिंह को गहरी साजिश की जानकारी मिली तभी उन्होंने जांच STF को देने का निर्णय लिया। इसके बाद STF की एंट्री हुई। सोमवार शाम KGMU कुलपति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए STF से ही आगे की जांच कराने के निर्देश दिए।

KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार शुरुआती जांच में कैंपस के अंदर किसी धर्मांतरण गैंग की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन पूर्व डीजीपी भावेश कुमार सिंह की संस्तुति पर जांच STF को सौंप दी गई है। सभी दस्तावेज सील कर कुलपति कार्यालय में रखे गए हैं। STF द्वारा दस्तावेज मांगे जाने पर उन्हें तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा।

आज सामान्य रूप से खुलेगी OPD

वहीं सोमवार को दिनभर चले हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद रात में अगले 24 घंटे के लिए KGMU की OPD ठप करने के फैसले को वापस ले लिया गया। कर्मचारी और डॉक्टर संगठन OPD हड़ताल को एक दिन के लिए टालने पर राजी हो गए। जिसके बाद मंगलवार को सामान्य कामकाज होगा और आगे की रणनीति पर बैठक के बाद निर्णय लिया जाएगा।

इससे पहले अपर्णा यादव से नाराज KGMU के डॉक्टरों ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर FIR दर्ज नहीं हुई तो मंगलवार को OPD बंद रखी जाएगी और केवल इमरजेंसी सेवाएं चलेंगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें पूरे प्रकरण और विशाखा समिति की रिपोर्ट से अवगत कराया था।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

वहीं KGMU कैंपस में हुई तोड़फोड़ और महिलाओं से अभद्रता को लेकर चीफ प्रॉक्टर ने पुलिस को लिखित शिकायत दी थी लेकिन 72 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। डॉक्टरों का कहना है कि जब कैंपस में कुलपति और वरिष्ठ अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं तो बाकी कर्मचारियों और छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

वहीं KGMU में आंदोलन की संभावनाओं को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। LIU भी लोगों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। STF ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन को भरोसा है कि जल्द FIR दर्ज कर ली जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल पीड़ित महिला डॉक्टर KGMU से एमडी पैथोलॉजी की पढ़ाई कर रही है। 17 दिसंबर को उसने दवा की ओवरडोज लेकर आत्महत्या की कोशिश की थी। 19 दिसंबर को उसे डिस्चार्ज किया गया। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि डॉ. रमीज ने उनकी बेटी पर धर्म परिवर्तन कर शादी करने का दबाव बनाया। इसके बाद राज्य महिला आयोग और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई। विशाखा समिति की रिपोर्ट आने के बाद आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया और परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी गई। आरोपी के माता पिता की संलिप्तता सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

 

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