गाजियाबाद के अस्पताल की इमारत में चल रहा था अवैध पटाखों का खेल, पुलिस की छापेमारी में खुली पोल

Ghaziabad News: गाजियाबाद के फर्रुखनगर क्षेत्र में पुलिस ने एक अस्पताल की इमारत पर छापा मारकर भारी मात्रा में अवैध पटाखों की खेप बरामद की है। इस अस्पताल की आड़ में ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीके से पटाखों की बिक्री की जा रही थी। मौके से पुलिस ने पांच बड़े बोरों में भरे पटाखे जब्त किए हैं, जिनकी कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। पुलिस ने मौके से अस्पताल में ही काम करने वाले एक आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है।

एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि फर्रुखनगर स्थित एक चार मंजिला इमारत में ‘आरोग्य अस्पताल’ संचालित हो रहा है। इस बिल्डिंग के दूसरे फ्लोर पर हैदर नामक व्यक्ति ने किराए पर कमरे ले रखे थे, जहां पटाखों का यह अवैध स्टॉक छिपाकर रखा गया था।

पुलिस के मुताबिक, पटाखों की बिक्री का तरीका किसी शॉपिंग मार्ट की तरह था, जहां ग्राहक अपनी पसंद के पटाखे चुनते थे। आरोपियों ने कानून और पुलिस की नजरों से बचने के लिए बेहद शातिर तरीके से अस्पताल की इस इमारत को अपने अवैध कारोबार का ठिकाना बनाया था। पुलिस को इस बात की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।

दूसरी मंजिल पर बना रखा था गोदाम

चार मंजिला इस इमारत के निचले दो फ्लोर पर अस्पताल चल रहा है, जबकि ऊपर की दो मंजिलों पर अस्पताल का स्टाफ अपने परिवार के साथ रहता है। इसी बीच, अस्पताल में काम करने वाले आरोपी हैदर ने दिवाली के त्योहार पर बेचने के लिए भारी मात्रा में पटाखों का भंडारण कर लिया था। जब सोशल मीडिया पर इस अवैध बिक्री की खबरें वायरल हुईं, तब पुलिस हरकत में आई और तुरंत छापेमारी कर दी।

पुलिस कार्यशैली पर उठे सवाल

हाल ही में गाजियाबाद के लाजपत नगर स्थित सामुदायिक केंद्र में रावण के पुतले में बारूद भरते समय हुए भीषण धमाके में चार लोगों की जान चली गई थी, जिससे आसपास के मकानों में भी दरारें आ गई थीं। उस हादसे में मौके पर 10 टन से अधिक बारूद रखे होने की बात सामने आई थी और डीसीपी ने जांच के आदेश दिए थे। हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में, अब एक अस्पताल के अंदर इतनी बड़ी मात्रा में पटाखों का अवैध स्टॉक पकड़े जाने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

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