अन्ना हजारे ने शुरू किया आमरण अनशन, बोले- जब तक लोकायुक्त कानून नहीं, तब तक अन्न-जल नहीं

Sandesh Wahak Digital Desk: देश में लोकपाल आंदोलन की अलख जगाने वाले अन्ना हजारे ने शुक्रवार से अपने पैतृक गांव रालेगणसिद्धी में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। शहीद दिवस के अवसर पर अन्ना ने साफ कर दिया कि यह आंदोलन उनके जीवन की आखिरी और निर्णायक लड़ाई है। उनकी मांग स्पष्ट है महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को पूरी तरह से लागू किया जाए।

अनशन पर बैठने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए अन्ना हजारे के तेवर बेहद कड़े नजर आए। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा, सरकार ने बार-बार वादे किए, लेकिन नतीजा सिफर रहा। फाइलों में काम दिखाने से भ्रष्टाचार नहीं मिटता। अगर सरकार वाकई ईमानदार है, तो वह लोकायुक्त कानून लाने से कतरा क्यों रही है? अन्ना ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब वे किसी भी मौखिक आश्वासन को मानकर अनशन खत्म नहीं करेंगे।

मंदिर परिसर बना आंदोलन का केंद्र

रालेगणसिद्धी के प्रसिद्ध यादवबाबा मंदिर परिसर में अन्ना का अनशन शुरू हो चुका है। अन्ना ने इसे जनहित की लड़ाई बताते हुए कहा कि जब तक सरकार लोकायुक्त कानून को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं करती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

88 की उम्र में भी अडिग हौसला

88 वर्ष की उम्र में अन्ना हजारे का यह कदम फिर से चर्चा में है। समर्थकों का कहना है कि अन्ना का यह अनशन उन लोगों के लिए एक उम्मीद है जो सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार से परेशान हैं। गांव के लोग और उनके अनुयायी बड़ी संख्या में रालेगणसिद्धी पहुंच रहे हैं, जिससे एक बार फिर पुराने लोकपाल आंदोलन जैसी सुगबुगाहट महसूस की जा रही है।

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