गंगा में रोजा खोलने के मामले पर Asaduddin Owaisi का हमला, प्रसाशनिक रवैये पर उठाए सवाल
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मुस्लिम युवकों द्वारा नाव पर रोजा खोलने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस घटना में 14 मुस्लिम युवकों के खिलाफ केस दर्ज किए जाने को लेकर असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई गंगा नदी में नाव पर खाना खाता है, तो इससे किसी की धार्मिक भावनाएं कैसे आहत हो सकती हैं और आखिर किसकी भावनाएं आहत हो रही हैं।
धार्मिक भावनाओं के मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया
ओवैसी ने प्रशासन के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि गंगा नदी में सीवेज का कचरा फेंके जाने से क्या किसी की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि रोजा खोलने वाले युवक जेल में हैं और उनका एकमात्र गुनाह यह है कि वे मुसलमान हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि जब रमजान के महीने में शराब की दुकानें खुली रहती हैं, तो क्या उससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं।
ओवैसी ने खासकर हिंदू युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश में बड़ी संख्या में ग्रेजुएट बेरोजगार हैं, लेकिन उनके दिमाग में नफरत भरी जा रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें ‘गौ रक्षक’ बनाने की दिशा में धकेला जा रहा है। उन्होंने दिल्ली के उत्तम नगर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां ईद मनाने को लेकर माहौल बिगड़ गया था, जिसके चलते कई मुस्लिम परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े और बाद में अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी साधा निशाना
इस दौरान ओवैसी ने ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों को लेकर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल गाजा की तरह ईरान को तबाह करना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह जंग बढ़ती है तो इसका असर अन्य देशों तक भी पहुंच सकता है।
ओवैसी ने कहा कि वह न तो किसी एक देश के पक्ष में हैं और न ही किसी के विरोध में, बल्कि उनका रुख सभी के साथ रहने का है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलिस्तीनियों के मुद्दे को वह अपना मुद्दा मानते हैं और लगातार उसके समर्थन में आवाज उठाते रहे हैं।
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