Asia Cup 2025: भारत-पाकिस्तान मुकाबले से पहले बढ़ा विरोध, BCCI के अधिकारी भी बना रहे दूरी
Sandesh Wahak Digital Desk: एशिया कप 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज मुकाबले में अब 24 घंटे से भी कम समय शेष है, लेकिन इस बार का माहौल पिछले वर्षों की तुलना में काफी अलग नजर आ रहा है।
रविवार को होने वाले इस महामुकाबले से पहले न तो टिकट पूरी तरह बिके हैं और न ही दर्शकों में वैसा उत्साह दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर भी फैंस इस मैच को लेकर विरोध जता रहे हैं और बहिष्कार की मांग कर रहे हैं।
इस बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के कई वरिष्ठ अधिकारी इस बार भारत-पाकिस्तान मैच से दूरी बना रहे हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई के कोई भी प्रमुख पदाधिकारी अब तक दुबई नहीं पहुंचे हैं, जहां यह मुकाबला खेला जाएगा।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीसीसीआई सचिव देवाजीत सैकिया, आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल, कोषाध्यक्ष प्रभतेज भाटिया, और संयुक्त सचिव रोहन देसाई ने दुबई नहीं जाने का निर्णय लिया है।
हालांकि, बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष राजीव शुक्ला के मैच के दौरान दुबई में मौजूद रहने की संभावना है।
पहलगाम आतंकी हमले के चलते उठे विरोध के सुर
भारत-पाकिस्तान मैच के इस विरोध के पीछे एक बड़ी और संवेदनशील वजह है। इस साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद से ही पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार के द्विपक्षीय संबंधों — खासकर क्रिकेट — पर सवाल उठने लगे हैं।
भारतीय फैंस सोशल मीडिया पर लगातार यह मांग कर रहे हैं कि ऐसे हालात में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना उचित नहीं है।
वे इस मैच को ‘राष्ट्रीय सम्मान’ से जोड़कर देख रहे हैं और बीसीसीआई को भी इस फैसले को लेकर आड़े हाथों ले रहे हैं।
पिछले वर्षों में भारत-पाक मुकाबले को लेकर जो जोश और टिकटों की भारी मांग देखने को मिलती थी, वह इस बार लगभग नदारद है। टिकटों की बिक्री भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सकी है।
सवालों के घेरे में बीसीसीआई
पहलगाम आतंकी हमले के बावजूद पाकिस्तान के खिलाफ मैदान में उतरने को लेकर बीसीसीआई को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। बोर्ड की चुप्पी और अधिकारियों की दूरी को कई लोग इस विरोध के समर्थन के रूप में देख रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि रविवार को होने वाला यह मुकाबला क्या केवल खेल तक सीमित रहेगा या इसके साये में राजनीति और जनभावनाएं भी अपना असर दिखाएंगी।
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