एशिया की पहली एनिमेट्रॉनिक हथिनी ‘एली’ पहुंची वाराणसी, सर्कस की बेड़ियों से आजादी की कहानी सुनकर रो पड़े बच्चे
दीया मिर्ज़ा की आवाज़ में रोई ‘एली’, हजारों बच्चों के दिलों में जगाई करुणा
Sandesh Wahak Digital Desk: सनबीम सनसिटी स्कूल के मैदान में उस वक्त सन्नाटा पसर गया जब एशिया की पहली ज़िंदगी जैसी एनिमेट्रॉनिक हथिनी ‘एली’ ने अपनी आंखें झपकाईं और दर्द भरी दास्तान सुनानी शुरू की।
बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्ज़ा की भावनात्मक आवाज़ में बोलती यह रोबोटिक हथिनी PETA इंडिया की ‘करुणा का नागरिक (Compassionate Citizen)’ मुहिम की नई उम्मीद बनकर वाराणसी पहुँची — और वहां मौजूद हजारों बच्चों के दिलों को छू गई।

माँ से बिछड़ने की कहानी सुनकर रो पड़े बच्चे
एली ने बच्चों से कहा,
“मुझे जन्म के कुछ दिन बाद ही माँ से अलग कर दिया गया। सर्कस की जंजीरों में बाँधकर अंकुश से मारा गया। लेकिन आज मैं अभयारण्य में आज़ाद हूँ।”
एली की ये बातें सुनकर कई बच्चों की आँखें नम हो गईं। कुछ तो खुद को रोक नहीं पाए और वहीं रो पड़े।

स्कूल प्रबंधन बोला — “किताबें नहीं, एली ने सिखाया असली सबक”
सनबीम ग्रुप के चेयरपर्सन डॉ. दीपक मधोक ने कहा,
“एली ने पाँच मिनट में वो सिखा दिया जो सालों की किताबें नहीं सिखा पातीं। बच्चों ने समझ लिया कि हाथियों की जगह सर्कस में नहीं, जंगल में है।”
वाइस चेयरपर्सन श्रीमती भारती मधोक ने भी कहा,
“आज हमारे बच्चों के दिल में करुणा का बीज बोया गया है। PETA द्वारा वाराणसी को चुना जाना हमारे लिए गर्व की बात है।”
PETA इंडिया का संदेश: “एली जीवंत प्रमाण है”
PETA की प्रवक्ता मीनाक्षी नारंग ने कहा,
“एली जीवंत प्रमाण है कि जानवर भी दर्द, डर और प्यार महसूस करते हैं। अब वक्त आ गया है कि हाथी सवारी, सर्कस और मेलों में उनका शोषण बंद किया जाए।”
आँकड़े जो बदल रहे हैं सोच
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मई 2023 से अब तक एली ने 2.20 लाख से अधिक बच्चों तक पहुँच बनाई है।
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‘Compassionate Citizen’ प्रोग्राम 9.3 करोड़ बच्चों को करुणा का पाठ पढ़ा चुका है।
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वाराणसी में एली अब सनबीम भगवानपुर, इंदिरानगर, क्रिमसन वर्ल्ड, आर्यन इंटरनेशनल, लहरतारा, वरुणा और सारनाथ स्कूलों में जाएगी।
सच्चाई जो छिपाई जाती है
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नवजात हाथियों को माँ से अलग कर जंजीरों में बाँधा जाता है
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अंकुश की नुकीली कीलें उनकी त्वचा फाड़ देती हैं
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कैद में हाथी पागल होकर खुद को चोट पहुँचाते हैं
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कईयों को खाना और पानी तक नहीं मिलता
PETA का अंतिम संदेश
“पशु हमारे मनोरंजन के लिए नहीं हैं।”
एली अब सिर्फ वाराणसी की गलियों में नहीं, बल्कि हजारों मासूम दिलों में बस गई है — और यह तो करुणा की एक नई शुरुआत है।
रिपोर्ट- एम.एम. पाठक
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