Prayagraj News: बिना संगम स्नान किए माघ मेला छोड़कर निकले अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- न्याय मिलने की उम्मीद टूटी

Prayagraj News: माघ मेले के सबसे बड़े केंद्र संगम नोज पर जाने को लेकर चल रहा विवाद बुधवार को तब निर्णायक मोड़ पर आ गया, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपना शिविर छोड़ने का फैसला किया। मीडिया से बात करते हुए शंकराचार्य कई बार भावुक हुए और उनका गला भर आया। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में कई दुख आए, लेकिन बिना स्नान किए माघ मेला छोड़ने का यह दुख सबसे बड़ा है।

शंकराचार्य ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा, मैं 11 दिनों से यहां बैठकर न्याय की प्रतीक्षा कर रहा था। भगवान श्रीराम ने भी समुद्र से रास्ता मांगने के लिए केवल तीन दिन प्रतीक्षा की थी और फिर उन्हें क्रोध आ गया था। हमने 11 दिन दिए, लेकिन न कोई सार्थक बैठक हुई और न ही हमारी बात सुनी गई।

अमित शाह के बयान पर कसा तंज

प्रशासन के व्यवहार और राजनीति पर बोलते हुए उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के एक हालिया बयान का जिक्र किया। शंकराचार्य ने कहा, कल ही अमित शाह जी ने गांधीनगर में कहा कि संतों का अपमान करने वाली सरकारें टिकती नहीं हैं। एक तरफ यह ज्ञान दिया जा रहा है और दूसरी तरफ साक्षात सनातन के प्रतीकों, बटुकों और संन्यासियों को अपमानित कर पीटा जा रहा है।

शंकराचार्य ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि अधिकारी उन्हें अकेले पालकी में ले जाकर स्नान कराने का ‘लालच’ दे रहे थे। उन्होंने कहा, यह मान-सम्मान की लड़ाई नहीं है, यह न्याय और अन्याय की बात है। अधिकारी उन मासूम बटुकों और संन्यासियों की पिटाई पर बात नहीं करना चाहते जिनका खून बहा है। वे मुझे प्रलोभन देकर उस पीड़ा को भुला देना चाहते थे, जिसे हमने महसूस किया है। मुझे लगा कि यह कोई नया षड्यंत्र है, इसलिए चले जाना ही बेहतर समझा।

छूट गया संगम का साथ

शंकराचार्य ने जाते हुए कहा कि संगम की लहरों में नहाना सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा की तृप्ति का मार्ग है। मैं यहां से भारी मन लेकर लौट रहा हूं। जो अपमान छोटे बच्चों और दंडी स्वामियों का किया गया, उसने न्याय और मानवता के प्रति मेरे विश्वास को झकझोर दिया है।

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