Ayodhya News: अवध विवि में विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया गया, छात्रों और शिक्षकों ने साझा किए विचार
Ayodhya News: डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में मंगलवार को विश्व फोटोग्राफी दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने फोटोग्राफी की महत्ता, उसके ऐतिहासिक विकास और आधुनिक दौर में उसकी भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
तस्वीरों में छिपी संवेदनशीलता
विभाग के शिक्षक डॉ. विजयेन्दु चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा कि फोटोग्राफी की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई थी और तब से लेकर अब तक उसने लंबा सफर तय किया है। उन्होंने कहा, “फोटोग्राफी केवल तकनीक नहीं, बल्कि दृष्टिकोण की कला है। एक ही दृश्य को अलग-अलग लोग अलग नजरिए से कैद करते हैं और हर तस्वीर का भाव बिल्कुल अलग होता है। यही फोटोग्राफी की सबसे बड़ी शक्ति है।”उन्होंने आगे कहा कि आज डिजिटल युग में फोटोग्राफी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। कैमरे के जरिए जीवन की छोटी-छोटी खुशियों, रिश्तों की मधुरता और प्रकृति की सुंदरता को कैद कर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्मृति के रूप में संजोते हैं।
मीडिया को सशक्त बनाती फोटोग्राफी
इस अवसर पर डॉ. आर.एन. पाण्डेय ने कहा कि फोटोग्राफर लेंस के माध्यम से दुनिया के सामने साक्ष्य प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी आज जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। विशेष रूप से फोटो जर्नलिज्म घटनाओं को जनमानस तक पहुंचाता है और उन्हें इतिहास में दर्ज करता है। पाण्डेय ने कहा, “फोटोग्राफी ने मीडिया को अधिक सशक्त और पारदर्शी बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।”
छात्रों ने भी साझा किए विचार
कार्यक्रम में छात्रों ने भी अपने अनुभव और विचार रखे। छात्रा सगुन ने कहा कि फोटोग्राफी का प्रयोग विज्ञान और अनुसंधान में व्यापक रूप से हो रहा है और इसने दुनिया को एक नई दृष्टि दी है। छात्र निलेश्वर पाण्डेय का कहना था कि पत्रकारिता के छात्रों के लिए फोटोग्राफी खबरों की पुष्टि का प्रमाण है। वहीं सुशील कुमार ने कहा कि आज फोटोग्राफी सभी क्षेत्रों में एक अनिवार्य साक्ष्य के रूप में प्रयोग हो रही है।
कार्यक्रम में रही उत्साहपूर्ण भागीदारी
इस अवसर पर कल्याणी यामिनी, सोनिया, अक्स पाण्डेय, अर्पिता तिवारी, रिंका, प्रिंस, आमीर और अलका सहित अन्य छात्र-छात्राएं भी मौजूद रहीं। सभी ने फोटोग्राफी को सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि समाज और संस्कृति को संजोने वाला सशक्त माध्यम बताया।
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