बड़ा खुलासा, भारत में जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात उल मोमिनात को फैला रहा अजहर मसूद
Sandesh Wahak Digital Desk: जाँच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेज़ों से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा हुआ है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना अजहर मसूद अपनी छोटी बहन सादिया अजहर के माध्यम से भारत में जैश की महिला विंग जमात उल मोमिनात का विस्तार करने में जुटा हुआ था।
जाँच में पता चला है कि इस खतरनाक मिशन की कमान अल फलाह यूनिवर्सिटी की महिला डॉक्टर शाहीन सईद को सौंपी गई थी। इस काम में पुलवामा हमले के बाद मारे गए अजहर मसूद के भतीजे उमर फारुख की पत्नी अफीरा बीबी भी शामिल थी।
हापुड़ और सहारनपुर में ट्रेनिंग सेंटर की थी साजिश
जाँच एजेंसियों के हाथ लगे महिला विंग विस्तार के ब्लू प्रिंट ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। एनआईए के अनुसार, शाहीन का इरादा एक एनजीओ की आड़ में हापुड़ व सहारनपुर में जैश की महिला विंग के ट्रेनिंग सेंटर खोलना था। शाहीन अपने स्थानीय संपर्कों के माध्यम से इसके लिए ज़मीन की तलाश कर रही थी। हापुड़ से पकड़े गए डॉक्टर फारुख और सहारनपुर से पकड़े गए डॉक्टर आदिल से भी उसकी बातचीत होती थी। एजेंसियों को ट्रेनिंग सेंटर का पूरा नक्शा मिला है, जिसमें दवाखाना, हॉस्टल और ट्रेनिंग कक्ष तक सब शामिल था।
बाहर दवाखाना, अंदर आतंकी ट्रेनिंग
जाँच एजेंसियों के मुताबिक, शाहीन ने ट्रेनिंग सेंटर का प्लान बेहद सोच-समझकर तैयार किया था। यहाँ एनजीओ के नाम पर लोगों को मुफ्त दवा देने के लिए एक दवाखाना खोलने की योजना थी। अंदर के हिस्से में एनजीओ से जुड़ी महिलाओं/युवतियों को रोजगार देने के नाम पर हॉस्टल बनाना था। एक बड़ा हॉल था, जहाँ उन्हें आतंकी वारदात की ट्रेनिंग दी जानी थी।

यूएई और पाकिस्तान से जुड़े तार
एनआईए की जाँच में शाहीन सईद के अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़ाव की जानकारी मिली है। कानपुर में अस्पताल की नौकरी छोड़ने के बाद शाहीन 2016 से 2018 तक दो साल यूएई में रही। यहीं वह आतंकी नेटवर्क के संपर्क में आई। उसके मोबाइल और लैपटॉप की जाँच में अजहर मसूद के भतीजे की बहू अफीरा बीबी से उसकी अच्छी जान-पहचान सामने आई।
एजेंसियों को शक है कि यूएई में रहने के दौरान शाहीन ने पाकिस्तान की यात्रा भी की थी। वह जैश की महिला विंग की कमान संभालने वाली अजहर मसूद की छोटी बहन सादिया अजहर के भी सीधे संपर्क में थी। भारत लौटने के बाद उसने अल फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी शुरू की और डॉक्टर मुजम्मिल व उमर के संपर्क में आई।

