बाफिला महाघोटाला: वर्षों से मेहरबानियों का दौर जारी, प्रमुख सचिव आवास भी एलडीए के ठेंगे पर

Sandesh Wahak Digital Desk: हजारों करोड़ के भूखंड घोटाले की मुखिया बहुजन निर्बल वर्ग और हिमालयन सहकारी आवास समिति पर सरकारी तंत्र खासा मेहरबान है। खासतौर से लखनऊ विकास प्राधिकरण अर्थात एलडीए।

 

तभी बाफिला गैंग के मददगार इन अफसरों ने समितियों को न सिर्फ बेहिसाब लाभ पहुंचाया बल्कि प्रमुख सचिव आवास को भी मानो ठेंगे पर रखा। ‘संदेश वाहक’ के पास मौजूद पूर्व प्रमुख सचिव आवास श्रीकृष्ण का पत्र साफ तौर पर पुष्टि करता है कि एलडीए अफसर न सिर्फ समितियों के फर्जीवाड़ों पर वर्षों से मेहरबान हैं बल्कि इसके प्रकरणों  से जुडी बैठकों तक से गायब रहते थे।

 

सीबीआई जांच से बेनकाब हो सकता है हजारों करोड़ का फर्जीवाड़ा

खासतौर से बाफिला गैंग हिमालयन समिति को बचाने के उच्चस्तरीय प्रयास लम्बे समय से कर रहा है। गैंग ने जिन अफसरों-कर्मियों को कीमती भूखंड देकर उपकृत किया है। उनमें एलडीए का नाम सबसे पहले आता है। सिर्फ सीबीआई जांच से हजारों करोड़ के इस फर्जीवाड़े का खुलासा बेनकाब हो सकता है। पत्रांक संख्या 269/पीएसएच/2008 दिनांक 31 दिसंबर 2008 को तत्कालीन प्रमुख सचिव आवास श्रीकृष्ण ने तत्समय एलडीए वीसी को एक कर्रा पत्र लिखकर अफसरों की कार्यप्रणाली और लापरवाही पर खूब फटकारा था।

 

 

प्रमुख सचिव ने लिखा था कि दिनांक 22.12.2008 के पत्र का सन्दर्भ लें, जिसके द्वारा निर्बल वर्ग सहकारी गृह निर्माण समिति, दि हिमालयन सहकारी आवास समिति  एवं सेवाग्राम सहकारी आवास समिति के प्रकरण पर दिनांक 29.12. 2008 को वार्ता बैठक के लिए बुलाया गया था। उक्त दिवस को प्राधिकरण की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ है। यह स्थिति अत्यन्त लापरवाही एवं शासन के आदेशों की अवहेलना का द्योतक है। दिनांक 02.01.2009 को अभिलेखों सहित उपस्थित होकर बतायें कि 29.12.08 को बैठक वार्ता में कोई क्यों नहीं उपस्थित हुआ तथा जिम्मेदारी निर्धारित करें। तत्कालीन प्रमुख सचिव के पत्र से साफ है कि एलडीए भूमाफियाओं के दबाव में शासन को ताख पर रखने में माहिर हैं। 18 साल गुजरने के बावजूद मेहरबानियों का दौर आज भी जारी है।

सैकड़ों अफसरों-कर्मियों को बांटे कीमती भूखंड, एलडीए सबसे ऊपर

सहकारिता विभाग के पत्रों के बावजूद हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा है। बहुजन समिति के ऑडिट की पहल तो हुई, लेकिन बाफिला गैंग की हिमालयन समिति पर मेहरबानी जारी है। पूर्व एलडीए वीसी समेत सैकड़ों सरकारी अफसरों-कर्मियों को वीआईपी लोकेशन पर भूखंड इस समिति के जरिये बांटे गये हैं। पूर्व वीसी राजीव अग्रवाल, पीएन सिंह और आवास आयुक्त बलकार सिंह की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई के नाम पर अफसरों  के पसीने छूट रहे हैं। रजिस्ट्री से आये अरबों रूपए आखिर कहां गए। मनीलांड्रिंग के बावजूद ईडी भी चुप्पी साधे है।

 

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