बाफिला महाघोटाला: हाईकोर्ट के फैसले में दिए गंभीर बिंदु दरकिनार, पुरानी शिकायत पर FIR

सहकारिता विभाग ने पुलिस कमिश्नर-डीसीपी पूर्वी को भेजा पत्र, कोर्ट के आदेश में दिए अहम बिंदुओं पर कार्यवाही को कहा

Sandesh Wahak Digital Desk: बहुजन निर्बल वर्ग सहकारी गृह निर्माण समिति और द हिमालयन सहकारी आवास समिति से जुड़े भूमाफिया बाफिला गैंग के पीछे ढाल बनकर कई अदृश्य ताकतें खड़ी हैं। इनको अरबों का लाभ बाफिला गैंग ने पहुंचाया है।

यही ताकतें समितियों पर कार्रवाई भी रोकने में शिद्द्त से जुटी हैं अन्यथा हाईकोर्ट के 20 अगस्त के सख्त फैसले को आधार बनाकर अभी तक एफआईआर हकीकत में दर्ज हो गयी होती। सहकारिता विभाग के अफसर इस तथ्य से वाकिफ हैं। तभी आनन फानन में हाईकोर्ट के आदेश से जुड़े गंभीर बिंदुओं पर कार्यवाही के लिए पुलिस कमिश्नर/डीसीपी पूर्वी को एक पत्र भेजा गया है। बाफिला गैंग के दबाव में हिमालयन समिति को बचाने के उच्चस्तरीय प्रयास भी जोरों पर हैं।

20 अगस्त को सुनवाई के दौरान एएजी प्रितिश कुमार ने हाईकोर्ट के विद्वान न्यायाधीश से कहा था कि राज्य सरकार एफआईआर दर्ज कर रही है। दरअसल सरकारी तंत्र ने हाईकोर्ट से सुनवाई के दौरान जिस एफआईआर को दर्ज कराये जाने का जिक्र किया। हकीकत में वो बहुजन निर्बल वर्ग समिति के सचिव की वो पुरानी शिकायत थी। जिस पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए वो जून से दौड़ रहा था। बाफिला गैंग के दबाव में सचिव की तहरीर पहले कूड़े के ढेर में फेंक दी गयी थी।

सहकारिता विभाग ने बिंदुवार किया हाईकोर्ट के आदेश का उल्लेख

लखनऊ की सहायक आयुक्त एवं सहायक निबन्धक सहकारिता वैशाली सिंह ने 22 अगस्त को पुलिस कमिश्नर/डीसीपी पूर्वी को भेजे पत्र में हाईकोर्ट द्वारा 20 अगस्त को दिए निर्णय में पुलिस विभाग को चार प्रमुख बिंदुओं पर कार्यवाही करने की याद दिलाई है। सहकारिता विभाग ने बिंदुवार हाईकोर्ट के आदेश का उल्लेख किया है। पत्र के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश के बिंदु संख्या 07 व 08 में बिक्री विलेख का उल्लेख करते हुए प्रतिवादी संख्या-10 के साथ-साथ प्रतिवादी संख्या -09 को भी दोषी पाया गया है।

 

 

 

बिन्दु संख्या-12 में उल्लेख किया गया है कि पुलिस /राज्य प्राधिकरण को जरूरी लगे, तो भूमि का आडिट करवाया जाये, जिसमें समिति की कुल भूमि, पिछले 10 वर्ष में हुए विलेख तथा बिक्री की रकम समिति के खाते में जमा हुई या नहीं, शामिल हो। बिन्दु संख्या-14 में कहा गया है कि यदि पुलिस अधिकारियों को उचित लगे, गबन किये गये पैसे की वसूली के लिए आवश्यक कार्यवाही करने व आवश्यक हो तो मनी लॉन्ड्रिग एक्ट के तहत कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है।

साथ ही पूरी जांच प्रक्रिया एसपी स्तर के अधिकारी की देख-रेख में करने का निर्णय दिया गया है। सहकारिता विभाग ने कहा है कि सम्बन्धित प्रकरण में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई तिथि 16 सितंबर नियत की गयी है। जिसमें प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है।  हालांकि सहकारिता-पुलिस दोनों के अफसर मामले में सिर्फ चुप्पी साधे हैं।

समाधान दिवस में भी नहीं सुनीं थी गुहार

बहुजन निर्बल वर्ग समिति के सचिव ने पूर्व में एफआईआर दर्ज कराने को सदर तहसील में नौ जून को सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी गुहार लगाई गयी थी। जिस पर जांच के आदेश हुए थे। गाजीपुर थाने में दर्ज एफआईआर में पुलिस ने कई गंभीर धाराओं की जगह सिर्फ धोखाधड़ी की एक धारा लगाकर तीन हजार करोड़ से ऊपर के जमीन फर्जीवाड़े को मानो बेहद हल्का कर दिया।

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