बलरामपुर: फर्जी डिग्री मामले में कार्रवाई शुरू, मदरसा प्रबंधक ने शिक्षक को एक सप्ताह का दिया अल्टीमेटम
ख़बर का असर: बलरामपुर के फर्जी शिक्षक भर्ती मामले में मदरसा शिक्षा विभाग में हड़कंप, जांच को लेकर प्रशासन गंभीर
बलरामपुर। फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे मदरसा शिक्षा विभाग में नौकरी करने के आरोपों से घिरे शिक्षक खुर्शीद अहमद के मामले में अब कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री को शिकायत भेजे जाने और आपके अख़बार ‘संदेश वाहक‘ में ख़बर प्रकाशित होने के बाद मदरसा अहले सुन्नत नुरुल उलूम अतिकीया, महाराजगंज तराई के प्रबंधक ने इस मामले में संज्ञान लिया है और शिक्षक से उनके मूल अभिलेख मांगे हैं।
दरअसल, अधिवक्ता अनिल कुमार ने खुर्शीद अहमद पुत्र मुन्तजिर अली पर फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था, जिसके बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने जांच की बात कही थी।

प्रबंधक ने शिक्षक को जारी किया नोटिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए मदरसा अहले सुन्नत नुरुल उलूम अतिकीया के प्रबंधक (सुब्राती) ने दिनांक 16/10/2023 को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस शिक्षक खुर्शीद अहमद को संबोधित है।
नोटिस में प्रबंधक ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक खुशीर अहमद व अन्य के शैक्षणिक अभिलेख व प्रमाण पत्र की सत्यापित कॉपी कई बार मौखिक रूप से मांगी गई और 03.05.2023 को रजिस्टर्ड डाक से भी मंगाना गया, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया। दिनांक 17.10.2023 को सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली है कि खुर्शीद अहमद की डिग्री फर्जी है और वह अवैध रूप से सरकारी धन ले रहे हैं।

शिक्षक को मिला एक सप्ताह का अल्टीमेटम
प्रबंधक ने शिक्षक खुर्शीद अहमद को अंतिम निर्देश देते हुए कहा है कि वह एक सप्ताह के भीतर अपना मूल अभिलेख प्रबंध समिति के समक्ष प्रस्तुत करें। ऐसा इसलिए ताकि बोर्ड से उसकी वेरिफिकेशन कराकर इस भ्रामक न्यूज़ का खंडन किया जा सके और सरकारी धन का अनियंत्रित भुगतान बंद कराया जा सके।
इस नोटिस की प्रतिलिपि जिलाधिकारी बलरामपुर, रजिस्ट्रार/निदेशक मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बलरामपुर को भी भेजी गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि उच्च स्तर पर भी इस मामले की गंभीरता को समझा जा रहा है।
ख़बर का असर
फर्जी मार्कशीट के सहारे नौकरी पाने के आरोप की ‘संदेश वाहक‘ अखबार में खबर प्रकाशित होने और मुख्यमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजे जाने के बाद यह इस मामले में पहला ठोस कदम है। मदरसा प्रबंधक द्वारा सीधे शिक्षक को मूल अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहना यह दर्शाता है कि अब शिक्षक पर दबाव बढ़ गया है। यदि शिक्षक निर्धारित समय में मूल अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं या जांच में उनकी मार्कशीट फर्जी पाई जाती है, तो उनकी नौकरी जाना तय माना जा रहा है। प्रबंधक ने सरकारी धन के अनियंत्रित भुगतान को बंद कराने की बात कहकर यह संकेत दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने पर शिक्षक का वेतन भी रोका जा सकता है।
प्रबंधक की बयान (नोटिस के अनुसार)
मदरसा अहले सुन्नत नुरुल उलूम अतिकीया, महाराजगंज तराई के प्रबंधक सुब्बराती ने शिक्षक को भेजे गए अपने नोटिस में कहा है, “अवगत हो कि आपके मदरसा में नियुक्त शिक्षक खुशीर अहमद व अन्य के शैक्षिक अभिलेख व प्रमाण पत्र की प्रमाणित कॉपी कई बार मौखिक मांगी गई और कार्यालय आदेश पत्रांक से भी मांगा गया मगर अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया। दिनांक 17.10.2023 को सोशल मीडिया न्यूज और कुछ अखबारों के माध्यम से हमें पता चला है कि शिकायत सही है और खुशीर अहमद की डिग्री फर्जी है, जिसके कारण वह अवैध रूप से सरकारी धन ले रहे हैं। इससे आपकी शिथिलता (लापरवाही) पर सहमति प्रतीत होती है।”
उन्होंने आगे कहा, “आपको पुनः निर्देशित किया जाता है कि खुर्शीद अहमद स०अ० फोकानिया के मूल अभिलेख एक हफ्ते में प्रबंध समिति के समक्ष प्रस्तुत करे ताकि बोर्ड से उसका वेरिफिकेशन कराके सरकारी धन का अनियंत्रित भुगतान बंद कराया जा सके।”
अब देखना होगा कि शिक्षक खुर्शीद अहमद आगे क्या कदम उठाते हैं और किस प्रकार की कार्रवाई करते हैं। खबर प्रबंधन समिति के इस लेटर के बाद कथित तौर पर फ़र्ज़ी मार्कशीट के सहारे नौकरी करने के आरोप में खुर्शीद अहमद घिरते नजर आ रहे हैं। उधर मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई शिकायत ने जिले के तमाम मदरसों में इन तरह से तैनात शिक्षकों की बेचैनी बढ़ा दी है।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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