बलरामपुर: रिश्वत प्रकरण में दरोगा पर कार्रवाई, तीन वर्ष तक न्यूनतम वेतनमान
Sanddesh Wahak Digital Desk: बलरामपुर में थाना महराजगंज तराई में तैनात रहे उपनिरीक्षक अजय गिरी के विरुद्ध रिश्वत लेने एवं विवेचना में अनियमितता बरतने के मामले में विभागीय कार्रवाई की गई है। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद आरोपी उपनिरीक्षक का मूल वेतनमान तीन वर्ष के लिए न्यूनतम कर दिया गया है।
रिश्वत लेकर विवेचना प्रभावित करने का मामला
मामले के अनुसार, उपनिरीक्षक अजय गिरी को एक मुकदमे की विवेचना सौंपी गई थी। विवेचना के दौरान उन्होंने पीड़ित से कथित रूप से व्यक्तिगत लाभ लिया और जांच को गलत तरीके से प्रभावित किया। आरोप है कि उन्होंने संबंधित व्यक्ति से रिश्वत लेकर न केवल विवेचना को प्रभावित किया, बल्कि आरोपी को लाभ पहुंचाने का प्रयास भी किया। इस पूरे प्रकरण का वीडियो भी सामने आया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

विवेचना में अनियमितता व रिश्वत लेने का आरोप
मामले का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने जांच अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डेय को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में शिकायत सही पाए जाने पर यह स्पष्ट हुआ कि उपनिरीक्षक ने कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती, विभागीय नियमों का उल्लंघन किया और अनुशासनहीनता का परिचय दिया।
जांच में यह भी सामने आया कि उपनिरीक्षक ने धन लेकर विवेचना को प्रभावित करने का प्रयास किया, जो पुलिस आचरण के विपरीत है। इसके बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए उनके वेतनमान में तीन वर्षों तक न्यूनतम स्तर पर रखने का दंड दिया गया। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार एवं अनुशासनहीनता के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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