बलरामपुर: मध्यान्ह भोजन योजना में 11 करोड़ से अधिक के गबन का मामला, दो और अभियुक्त गिरफ्तार
सरकारी दस्तावेजों में कूटरचना कर बच्चों के निवाले में करोड़ों का गबन, कोतवाली नगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
Sandesh Wahak Digital Desk: बलरामपुर जिले में मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) के तहत सरकारी धन के बड़े गबन के मामले में बलरामपुर पुलिस ने दो और अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। थाना कोतवाली नगर क्षेत्र से जुड़े इस प्रकरण में सरकारी दस्तावेजों में कूटरचना कर 11 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के गबन का आरोप है। मामले में अब तक कुल सात अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि इस मामले में विवेचना जारी है।
सरकारी दस्तावेजों में कूटरचना कर बच्चों के निवाले में करोड़ों का गबन
गौरतलब है कि 26 नवंबर 2025 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला द्वारा कराई गई जांच के बाद थाना कोतवाली नगर में तहरीर दी गई थी। जांच में सामने आया कि डीसी एमडीएम (मध्यान्ह भोजन योजना) से जुड़े अधिकारियों, मदरसा से जुड़े व्यक्तियों व परिषदीय विद्यालयों से अधिकारियों व शिक्षकों ने आपसी साठगांठ कर सरकारी अभिलेखों में कूटरचना की और प्रथम दृष्टया 11 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी धनराशि का गबन किया। इस संबंध में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा संख्या 297/2025 धारा 409, 467, 468, 471, 120बी व 201 भारतीय दंड संहिता के तहत डीसी एमडीएम फिरोज अहमद खान समेत 45 लोगों के विरुद्ध पंजीकृत किया गया।
कोतवाली नगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
इसी कड़ी में कोतवाली नगर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मंगलवार को विजलीपुर बायपास के पास से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान साहेब राम पुत्र स्वर्गीय कन्हैया लाल, निवासी हरिहर नगर, थाना महराजगंज तराई तथा दानिस पुत्र मोबीन, निवासी महराजगंज तराई, जनपद बलरामपुर के रूप में हुई है। दोनों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।
कई अभी जांच के दायरे में
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 27 नवंबर 2025 को इसी मामले में डीसी एमडीएम रहे फिरोज अहमद, प्राचार्य नसीम अहमद, अशोक कुमार गुप्ता, मदरसा प्रबंधक अहमदुल कादरी और शिक्षक मलिक मुन्नवर को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और अन्य आरोपितों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जल्द ही अन्य गिरफ्तारियां भी संभव हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में अब तक 11 करोड़ से अधिक के सरकारी धन के निकासी की बात सामने आ चुकी है। यह घोटाला एमडीएम डीसी रहे फ़िरोज़ अहमद के द्वारा एक संगठित गिरोह बनाकर किया जाता था।
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