Balrampur News: सीएचसी शिवपुरा बना बीमारियों का अड्डा, खुले में फेंका जा रहा मेडिकल बायो-वेस्ट
Sandesh Wahak Digital Desk: बलरामपुर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के तमाम दावों के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) शिवपुरा में मेडिकल बायो-वेस्ट के खुले खेल ने स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
यहां अस्पताल परिसर में जगह-जगह इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन, खून से सने कॉटन, सिरिंज, ग्लव्स और लाल-पीले बायो-वेस्ट बैग खुले में पड़े मिले।
जो ना सिर्फ संक्रमण का खतरा बढ़ाते हैं, बल्कि बच्चों की जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
बायो-वेस्ट से खेलते बच्चे, बालश्रम का भी खुला उल्लंघन
सबसे चिंताजनक तस्वीर तब सामने आई जब छोटे बच्चे इन खतरनाक कचरों को इकट्ठा कर बेचने के लिए ले जाते दिखे।
बच्चों की सेहत को सीधा खतरे में डालने वाली इस लापरवाही पर जब अस्पताल प्रशासन से सवाल किए गए, तो अधीक्षक डॉ. रजत शुक्ला ने गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा, “बच्चों से झाड़ू लगवाया जा रहा है, आप जैसा चाहें वैसा लिख लीजिए।”
इस बयान ने न सिर्फ बायो-वेस्ट प्रबंधन की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि बाल अधिकार कानून और स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस का भी खुलेआम उल्लंघन उजागर किया।
संक्रमण का खतरा, WHO की गाइडलाइंस की अनदेखी
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मेडिकल कचरे से एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, टिटनेस और अन्य गंभीर संक्रमण फैल सकते हैं।
WHO और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार ऐसे कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण अनिवार्य है, लेकिन यहां स्थिति उलट दिखी।
CMO के निरीक्षणों की हकीकत भी उजागर
इस पूरे मामले ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और एडिशनल CMO के निरीक्षणों की वास्तविकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जो कागजों में तो होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है।
प्रशासन से जवाब की मांग
अब ज़रूरत है कि जिला प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे और इस मामले में जवाबदेही तय की जाए।
स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि बायो-वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की सख्त व्यवस्था करे और बालश्रम जैसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अन्यथा, यह लापरवाही किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा का कारण बन सकती है।

