बलरामपुर: इंडियन बैंक में सरकारी कर्ज के नाम पर फर्जीवाड़ा, मैनेजर-ब्रोकर गठजोड़ ने लूटा गरीब का पैसा

बैंक मैनेजर का 'मास्टरस्ट्रोक'! सरकारी योजना के ₹1.5 लाख हड़प गया गैंग, गरीब युवा के सपनों पर फेरा पानी

बलरामपुर: मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना में गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने की मंशा पर इंडियन बैंक के एक मैनेजर ने ऐसा पानी फेरा है कि पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है। मामला उतरौला क्षेत्र का है, जहाँ एक गरीब युवक को व्यवसाय शुरू करने के लिए मिला सरकारी कर्ज बैंक मैनेजर और एक ठेकेदार के ‘सेट किए गए खेल’ की भेंट चढ़ गया।

​जानिए क्या है पूरा मामला?

​उतरौला के अमन गुप्ता ने अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए उद्योग विभाग बलरामपुर से 4,50,000 रुपए का ऋण (लोन) स्वीकृत करवाया था। इसमें अमन ने खुद भी सिक्योरिटी अंशदान के तौर पर 50,000 रुपए जमा किए थे। योजना के तहत अमन को ₹1,80,000 की मशीनरी और 3,20,000 रुपए की क्रियाशील पूंजी मिलनी थी।

​मैनेजर ने कैसे खेला ‘गजब का खेल’?

​अमन ने अपनी तरफ से तीन अलग-अलग दुकानों से मशीनरी के कोटेशन लाकर इंडियन बैंक की इमिलिया शाखा उतरौला में जमा किए, लेकिन मैनेजर ने उसकी एक न सुनी। आरोप है कि बैंक मैनेजर ने जानबूझकर अपने ‘सेट किए गए’ ठेकेदार “शंकर ट्रेडिंग कंपनी बलरामपुर” से महंगे दामों का फर्जी कोटेशन बनवाया।

​इसके बाद, गरीब युवक अमन से सादे फॉर्म पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 4,01,000 रुपए की पूरी लोन राशि अमन की जानकारी के बिना सीधे शंकर ट्रेडिंग कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।

​₹1.5 लाख का सीधा ‘घोटाला’

​पीड़ित अमन का कहना है कि ठेकेदार (शंकर ट्रेडिंग कंपनी) ने जो बिल दिया, उस हिसाब से न तो पूरा सामान दिया गया और जो मशीनरी दी गई, उसका बाजार मूल्य मुश्किल से 2,50,000 रुपए है। यानी, साफ तौर पर लगभग डेढ़ लाख रुपये की हेराफेरी का यह सीधा मामला है! ​अमन ने जब इस भ्रष्टाचार की शिकायत बैंक में की, तो मैनेजर ने उसकी फरियाद सुनने के बजाय उसे बैंक से धमकाकर बाहर निकाल दिया।

क्या बोला ​पीड़ित व्यक्ति?

अमन गुप्ता ने रोते हुए बताया, “मैंने बैंक मैनेजर से सिर्फ अपनी क्रियाशील पूंजी मांगी थी ताकि अपना काम शुरू कर सकूं, लेकिन उन्होंने मुझे धमकाकर बाहर निकाल दिया। मेरा सारा पैसा मैनेजर और शंकर ट्रेडिंग कंपनी ने आपस में बांट लिया है।”

​स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में यह ‘बैंक-ब्रोकर मिलीभगत’ कोई पहली बार नहीं हुई है। गरीब और बेरोजगार युवकों को इस तरह लगातार ठगा जा रहा है।

वही, जब मैनेजर इंडियन बैंक इमलिया शाखा के ब्रांच मैनेजर संजय मिश्रा से जब हमने इस मामले में जानकारी लेने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि आप मेरे अधिकारी नहीं है जो मैं आपके सवालों का जवाब देता फिरूँ। उन्होंने कहा कि इस मामले में डीएम एसपी तक से शिकायत हो चुकी है। लेकिन कुछ नहीं हुआ। जांच में सब कुछ सही पाया गया है।

वहीं, पीड़ित का कहना है कि मेरी शिकायत पर जो जांच हुई थी, उसे मैनेजर साहब ने धन-बल से दबाने का काम किया है। उनकी पत्नी किसी जगह पर जुडिशल मजिस्ट्रेट है। इसलिए वह अपने पावर और पैसे का इस्तेमाल कर, बैंक में तमाम तरह की गड़बड़ी कर रहे हैं। हम जैसे युवा उद्यमियों का वह सपना पूरा नहीं होने दे रहे हैं।

​अब बड़ा सवाल

​क्या जिला प्रशासन और बैंक मुख्यालय इस गंभीर घोटाले की निष्पक्ष जांच करेगा? मुख्यमंत्री की मंशा पर पानी फेरने वाले ऐसे भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई कब होगी? अगर गहन जांच हुई तो बैंक-ब्रोकर के इस ‘गठजोड़’ के कई और चौंकाने वाले राज खुल सकते हैं।

रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी

 

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