Balrampur News: ‘कागजी बांधों’ में लुट गए करोड़ों रुपये, पूर्व BJP विधायक ने सीएम से की जांच की मांग
Balrampur News: जनपद में बाढ़ बचाव कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला गरमाता नजर आ रहा है। गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के पूर्व विधायक शैलेश कुमार सिंह ‘शैलू’ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बाढ़ खंड के अधिकारियों और इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बिना टेंडर ‘चहेतों’ पर मेहरबानी
पूर्व विधायक ने अपने शिकायती पत्र में खुलासा किया है कि बाढ़ खंड बलरामपुर के जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने पद का जमकर दुरुपयोग किया है। आरोप है कि उपखंड स्तर पर बिना किसी पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के, चहेते ठेकेदारों को अनुबंध (Agreements) बांट दिए गए और करोड़ों रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। विधायक का दावा है कि कई मामलों में तो धरातल पर कोई काम ही नहीं हुआ और केवल कागजों पर खानापूर्ति कर सरकारी खजाना खाली कर दिया गया।
नदी शांत रही, पर बजट की ‘बाढ़’ आ गई
पत्र में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी रखा गया है कि वर्ष 2025 में राप्ती नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु (Warning Level) से ऊपर नहीं गया था। इसके बावजूद, मधवानगर खादर, इमिलिया खादर, बरगदहा और सोहना जैसे गांवों में छोटे-छोटे बांधों और सुरक्षा कार्यों के नाम पर भारी-भरकम भुगतान किया गया। पूर्व विधायक ने सवाल उठाया है कि जब आपदा की स्थिति ही नहीं बनी, तो फिर किन कार्यों के नाम पर यह मोटी रकम निकाली गई?
मानक और गुणवत्ता पर उठते सवाल
शैलू सिंह ने केवल बिना टेंडर वाले कार्यों पर ही नहीं, बल्कि टेंडर के माध्यम से हुए 30 से 50 प्रतिशत कार्यों पर भी उंगली उठाई है। उन्होंने मांग की है कि: क्या ठेकेदारों ने स्वीकृत ‘एस्टीमेट’ और अनुबंध की शर्तों के अनुसार काम किया है? क्या मौके पर इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है? अभिलेखीय जांच के साथ-साथ मौके पर ‘भौतिक सत्यापन’ कराया जाए ताकि असलियत सामने आ सके।

भविष्य की आपदा का अंदेशा
पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री को आगाह किया है कि यदि इन कार्यों की गुणवत्ता सही नहीं हुई, तो आने वाले मानसून और बाढ़ के समय गैसड़ी क्षेत्र के गांवों में भारी तबाही मच सकती है। मानक विहीन कार्य जनजीवन को संकट में डाल सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि तत्काल एक विशेष जांच टीम गठित कर सभी अभिलेखों को जब्त किया जाए और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
इस पत्र के बाद जिले के प्रशासनिक और विभागीय गलियारों में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति रखने वाली सरकार के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अब सबकी निगाहें लखनऊ से आने वाले आदेशों पर टिकी हैं।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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