Balrampur News: जिले के सबसे बड़े अस्पताल में अव्यवस्थाओं का अंबार, सीडीएच को ख़ुद है इलाज की दरकार

पढ़िए, अनियमितता और उदासीनता की कहानी, मरीजों और तीमारदारों की जुबानी

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश का बलरामपुर जिला यूँ तो नीति आयोग के तहत आने वाला एक एक्सप्रेशनल डिस्ट्रिक्ट है। जहां पर स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा तक पर तमाम तरह की कवायद की जा रही है, जिससे पिछड़ेपन का दंश मिट सके। लेकिन सरकारी अधिकारियों की उदासीनता की वजह से यहां पर व्यवस्थाएं लगातार खराब होती जा रही हैं। इसका ताजा उदाहरण देखने को मिला है, अटल बिहारी वाजपेयी स्वासशी मेडिकल कॉलेज के अधीन आने वाले संयुक्त जिला चिकित्सालय में। यह लगभग 150 बेड का हॉस्पिटल उदासीनता की भेंट चढ़ता हुआ दिख रहा है।

जहां पर दूरदराज इलाकों से आने वाले मरीजों को ना तो समय पर चिकित्सीय सुविधाएं मयस्सर हो पा रही है। ना ही उन्हें मानकों के हिसाब से इलाज मिल पा रहा है। संयुक्त जिला अस्पताल में ना तो मशीने हैं और ना ही मरीजों के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाएं, यहां पर मरीज आते तो हैं अपने इलाज के लिए लेकिन वह यहां से और अधिक परेशान होकर जाते हैं। मरीजों ने कहा कि इस अस्पताल में समय पर अब कुछ नहीं होता है। ना डॉक्टर समय से बैठते हैं और ना ही यहां पर अधिकारी। पूरा का पूरा अस्पताल सरकारी सिस्टम की उदासीनता भेंट चढ़ा हुआ है। पढ़िए, योगेंद्र त्रिपाठी की यह विशेष रिपोर्ट…

 

यहां मरीजों को नहीं मिलता स्ट्रेचर और बेड

उतरौला क्षेत्र के दारीचौरा गांव की रहने वाली प्रियंका कश्यप उम्र (15 वर्ष) खून की कमी की बीमारी जूझ रही है। स्थानीय जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि राम प्रताप वर्मा उसे लेकर आए और संयुक्त जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों ने उसे खून चढ़ाने की बात कही। राम प्रताप वर्मा और उनके दो अन्य साथियों ने 3 यूनिट खून डोनेट किया। जब खून आ गया तो वहां तैनात कर्मियों से जब बीमार लड़की को चढ़ाने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि हमारे पास ब्लड ट्रांसफर यूनिट नाम की मशीन नहीं है, जिस कारण यह खून नहीं चढ़ सकता है।

राम प्रताप वर्मा बताते हैं कि प्रियंका बेहद ग़रीब परिवार से आती है। उसे परिजन किसी तरह से मेहनत मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं। जब 150 बेड के इतने बड़े अस्पताल में खून चढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं है तो कैसे माना जाए सब सही है। उन्होंने बताया कि हम लोगों 10 बजे तक का इंतजार किया लेकिन अस्पताल में उस समय तक कोई डॉक्टर डयूटी पर नहीं आया था। हमने अपनी समस्या बताने के लिए सीएमएस राज कुमार वर्मा को लगभग 100 बार कॉल किया लेकिन उनका नंबर लगातार बंद आ रहा था। उन्होंने बताया कि अगर इतने बड़े सरकारी अस्पताल में अव्यवस्थाओं का अंबार है तो जिले में सीएचसी और पीएचसी का क्या ही हाल होगा। फिलहाल प्रियंका का इलाज अन्य जगह पर करवाया जा रहा है।

कोई ज़मीन पर है लेटा तो कोई गोद में मरीज को उठाकर करवा रहा है इलाज

कुछ व्यक्ति 11 बजे के करीब हमें अस्पताल परिसर के भीतर फर्श पर कई लोग इधर उधर लेटे मिले। पूछने पर बताया कि हम इलाज के लिए आए हैं, लेकिन सुबह डॉक्टर नहीं थे। हम लोग जल्दी ही आ गए थे। पर्चा भी कटवा लिया था, लेकिन अभी तक इलाज नहीं हो सका है। लेटे हुए लोगों में हमें एक व्यक्ति गंभीर हालत में मिला, जिसे इलाज की तत्काल जरूरत थी। लेकिन वह अपनी बारी के आने का इंतजार कर रहा था। अस्पताल में आए तीमारदारों ने बताया कि संयुक्त जिला अस्पताल में अब इलाज बेमानी हो चुका है। अस्पताल प्रशासन और मेडिकल कॉलेज के बीच चल रहे खींच तान की वजह से ना तो यहां समय से डॉक्टर बैठे हैं ना ही दवाओं और सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता है।

अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह से चौपट

सुबह लगभग 10 बजे वक्त, एक व्यक्ति बीमार मरीज को अपने गोद में उठाकर ले जा रहा है। जब हमने उससे पूछा तो बताया कि यहां पर हमें ना तो स्ट्रेचर मिला और ना व्हीलचेयर, इस कारण से हम अपनी मां को गोद में उठाकर एक्स रे कक्ष तक जा रहे हैं। तीमारदार ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। यहां पर सुविधाओं के लाले हैं। हमें समय से ना तो डॉक्टर मिलते है और न ही समय से हमें अन्य सुविधाएं।

बलरामपुर सदर क्षेत्र के बैजपुर गांव के रहने वाले पवन यादव ने बताया कि वह अपने मरीज को लेकर आए हुए हैं, खूब की कमी की शिकायत है। सुबह जांच के लिए डॉक्टर ने भेजा था। सुबह से ही अब 12 बज चुके हैं। हम अपनी रिपोर्ट लेने के लिए जब पैथोलॉजी में गए तो कहा गया कि आपकी रिपोर्ट चार बजे मिलेगी। अब बताइए, इतनी देरी से रिपोर्ट मिल रही है तो इलाज कब होगा। कौन डॉक्टर चार बजे तक इंतजार करेगा, इस बीच अगर हमारे मरीज की हालत खराब हो जाती है या कुछ हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

क्या कहते हैं अधिकारी?

पूरे मामले की जानकारी लेने के लिए जब संदेश वाहक की टीम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मुकेश रस्तोगी को कॉल किया तो उनका सरकारी सीयूजी नंबर बंद बता रहा था। वहीं, संयुक्त जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ राज कुमार वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आपके द्वारा मामले को संज्ञान में लाया गया गया। कोई व्यक्ति अगर हमें लिखित में शिकायत करता है तो संबंधित के ऊपर कार्रवाई की जाएगी। जहां तक रही बात व्हीलचेयर या स्ट्रेचर की तो जिसकी कस्टडी में यह सब होता है अगर उसने संबंधित मरीज को नहीं उपलब्ध करवाया है तो हम उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

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