थारू विकास परियोजना पर भ्रष्टाचार का डाका, बलरामपुर में 6.90 करोड़ का बजट, लेकिन ज़मीन पर 50 प्रतिशत काम भी नहीं
Balrampur News: योगी सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखाते हुए बलरामपुर में भ्रष्टाचार का एक ऐसा ‘तंत्र’ विकसित हुआ है, जिसने थारू जनजाति के विकास के लिए आए करोड़ों रुपयों में लाखों के धन को कागजों पर ही सोख लिया। विकास के नाम पर बिछाई गई इंटरलॉकिंग सड़कें पहली बारिश भी झेलने के काबिल नहीं है। सड़कें कहीं धंस रही हैं तो कहीं उनकी एजिंग टूट रही है।
सड़क किनारे बनाए जाने वाली नाली और लगने वाले सोलर लाइट का कहीं कोई अता पता भी नहीं है। इस तरह सड़कें और उससे जुड़े निर्माण कार्य पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं। वहीं सोलर लाइटों के नाम पर अंधेरे का साम्राज्य कायम है। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में सेंधमारी कर अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत ने थारू बाहुल्य इलाके में पिछड़ेपन के माथे पर ‘घोटाले’ की नई इबारत लिख दी है।

लाखों का वारा-न्यारा करते ठेकेदार
उत्तर प्रदेश के अति-पिछड़े जिलों में शुमार बलरामपुर से विकास कार्यों में सरकारी धन के बंदरबांट और लूट की एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ आयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘थारू जनजाति विकास योजना’ के अंतर्गत होने वाले निर्माण कार्यों को भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों ने अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। प्राप्त आंकड़ों और जमीनी हकीकत के अनुसार, लगभग 6 करोड़ 90 लाख रुपये का बजट विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला में तब्दील हो गया है।

मानकों की धज्जियां, जमीन पर काम अधूरा
यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPSIDCO) के माध्यम से कराए जा रहे इन कार्यों में अनियमितता की सारी हदें पार कर दी गई हैं। थारू बाहुल्य क्षेत्रों कन्हैयाडीह, उत्तर बनकटवा, कुदरगोड़वा, मोतीपुर, जोगियाहवां, मुसहरपुरवा, भौरीसाल और चन्दनपुर में इंटरलॉकिंग सड़क, नाली और सोलर लाइट के नाम पर करोड़ों के वारे-न्यारे किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़कों का निर्माण मानक विहीन है और कहीं भी नाली का निर्माण नहीं कराया गया, जबकि बजट में इसके लिए भारी-भरकम राशि आवंटित थी।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में दोयम दर्जें के ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। जो निर्माण के साथ ही टूट रहे है। इसके साथ ही इंटरलॉकिंग लगाने के लिए एजिंग में 8 अनुपात एक के सीमेंट मसाले का उपयोग किया गया है। भौरीसाल के ग्रामीण के तो यहां तक कहते हैं कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी कर कम चौड़ी सड़क का निर्माण करवाया जा रहा है। इसमें केवल एक गाड़ी ही आ जा सकती है।

कागजों पर चमक, धरातल पर अंधेरा
आंकड़ों व सूत्रों के अनुसार, थारू आबादी से आबाद विभिन्न ग्राम सभाओं में सोलर लाइट और इंटरलॉकिंग के लिए अलग-अलग किस्तों में लाखों रुपये (जैसे कन्हैयाडीह हेतु 79.77 लाख, मोतीपुर हेतु 78.58 लाख, भौरीसाल 33.72,भुसहरपुरवा, 44.16 लाख) स्वीकृत किए गए थे। इसी तरह से विशुनपुर विश्राम में 2 करोड़ 11.93 लाख रुपए की लागत से सिलाई कढ़ाई सेंटर व कंप्यूटर सेंटर का निर्माण करवाया जा रहा है। यहां पर भी नियमों की अनदेखी की जा रही है। बताया जाता है कि इन स्थानों पर हो रहे निर्माण कार्यों में परोक्ष या अपरोक्ष रूप से नियमों की अनदेखी की जा रही है और मानकविहीन निर्माण कार्य करवाए जा रहे हैं।
वहीं, ग्रामीणों का गुस्सा इस बात पर फूटा है कि ज़मीन पर सड़कों के निर्माण का काम या तो आधा-अधूरा है, या उसकी गुणवत्ता इतनी घटिया है कि वह कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना नाली निर्माण के बिना ही ‘पूर्णता’ का दावा कैसे किया जा रहा है? साथ ही सभी सड़कों के किनारे अभी तक सोलर लाइट भी नहीं लगवाया गया है। जबकि जिन ग्राम सभाओं में थारू विकास परियोजना के तहत इन सड़कों का निर्माण करवाया जा रहा है, वह जंगल के किनारे हैं और यहां पर अंधेरे में जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है।

किसके संरक्षण में फल-फूल रहा भ्रष्टाचार
थारू जनजाति को मुख्य रूप से विकास की धारा से जोड़ने के लिए सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं उत्साहित दिखते हैं। इसी का परिणाम है कि थारू बहुलता वाले ग्राम पंचायतों में विकास को घर घर तक पहुंचाया जा रहा है। उनके सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से परिपूर्ण किया जा रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री के अतिमहत्वाकांक्षी परियोजनाओं में भी लोगों के हक पर डाका डालने वाले इन ठेकेदारों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? जिले का प्रशासनिक अमला इस अनियमितता पर ‘कुंभकर्णी नींद’ सोया हुआ है। योगी सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद, बलरामपुर में भ्रष्टाचार का खेल खुलेआम जारी है। जनजातीय बाहुल्य इलाकों में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग कर ठेकेदारों ने शासन की मंशा पर पानी फेर दिया है।

करोड़ों का बजट, पर सुविधा शून्य
हैरानी की बात यह है कि अकेले विशुनपुर विश्राम में सिलाई-कढ़ाई और कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर के नाम पर 2.11 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि आवंटित है। जहां पर सफेद बालू और दोयम दर्जें के इंटों से निर्माण करवाया जा रहा है। जबकि नियम के अनुसार, इस तरह की सामग्री का उपयोग नहीं होना चाहिए। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यदि इस भारी-भरकम बजट का 50 प्रतिशत भी ईमानदारी से धरातल पर लगा होता, तो गांवों की सूरत बदली होती। लेकिन असलियत में न नालियां बनीं और न ही सोलर लाइटें जल रही हैं।

ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और अधूरे दावों को लेकर अब ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे इस लूट की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल और उच्चाधिकारियों से करेंगे। अब देखना यह होगा कि ‘न्याय’ के लिए जानी जाने वाली सरकार इन भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों पर क्या कार्रवाई करती है।

क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी
वहीं, हमने जब इन निर्माण कार्यों में चल रही अनियमित और भ्रष्टाचार पर यूपीसिडको के अधिशासी अभियंता देवेंद्र सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि नियमित तौर पर प्रोजेक्ट की जांच करवाई जाती है। हमारे इंजीनियर लगातार जमीन पर जाकर प्रोजेक्ट की हकीकत को देखने का काम करते हैं। आपके द्वारा मामले का संज्ञान लाया गया है। हम इसमें जांच करते हुए आगे कार्रवाई करेंगे व गुणवत्ता को विशेष रूप से मेंटेन किया जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थारू विकास परियोजना के अंतर्गत विभिन्न ग्राम सभाओं में इंटरलॉकिंग सड़क, नाली और सोलर लाइट के लिए कुल 6 करोड़ 90 लाख 11 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है।
रिपोर्ट- योगेंद्र त्रिपाठी

