Dream11, MPL समेत सभी रियल मनी गेमिंग ऐप्स पर लगा बैन, सरकार ने बताया ‘जुआ और सट्टा’

Sandesh Wahak Digital Desk: केंद्र सरकार ने रियल मनी गेमिंग (RMG) को जुए और सट्टेबाजी का एक रूप मानते हुए इसे बैन कर दिया है। इस फैसले से Dream11, MPL और PokerBaazi जैसी बड़ी गेमिंग कंपनियों में हड़कंप मच गया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि ये गेम्स ड्रग्स से भी ज्यादा खतरनाक हैं, जिनसे आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं और गरीब-मध्यम वर्ग को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

क्या है नया कानून?

हाल ही में संसद में Promotion and Regulation of Online Gaming Bill, 2025 पास किया गया है। इस कानून में साफ कहा गया है कि किसी भी रियल मनी गेम, उसके प्रमोशन और ट्रांजेक्शन की इजाजत नहीं होगी। नियम तोड़ने पर कंपनियों पर ₹1 करोड़ तक का जुर्माना और 3 साल तक की जेल हो सकती है। वहीं, प्रमोशन करने वालों पर भी ₹50 लाख का जुर्माना और 2 साल तक की जेल का प्रावधान है।

इस कानून के बाद Dream11, MPL, Gameskraft, WinZO, Zupee, Junglee Games, और Pokerbaazi जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स ने तुरंत अपने पैसे वाले गेम्स बंद कर दिए हैं। हालांकि, इन कंपनियों ने अपने यूजर्स को भरोसा दिलाया है कि उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है और उन्हें वापस कर दिया जाएगा।

ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स पर नहीं होगा असर

सरकार का कहना है कि यह बैन सिर्फ उन गेम्स पर है जहाँ पैसे लगाकर ज्यादा पैसे कमाने की उम्मीद होती है। इसका असर ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग पर नहीं पड़ेगा। सरकार इन दोनों को बढ़ावा देगी और इसके लिए एक National Gaming Commission का गठन भी होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा है कि भारत को गेमिंग हब बनाने की दिशा में काम हो रहा है। Zupee जैसे प्लेटफॉर्म्स ने अपने रियल मनी गेम्स बंद कर दिए हैं, लेकिन मुफ्त गेम्स जारी रखे हैं। इसी तरह, Dream11 और My11Circle ने भी अपने फैंटेसी गेम्स रोक दिए हैं।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का कहना है कि यह कदम जनहित में लिया गया है। रियल मनी गेम्स से लोगों में आर्थिक नुकसान, मानसिक तनाव और लत जैसी समस्याएं बढ़ रही थीं। इसके अलावा, डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टो के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी फंडिंग का खतरा भी बढ़ रहा था।

हालांकि, कुछ इंडस्ट्री बॉडीज इस फैसले का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि इससे भारतीय कंपनियों को नुकसान होगा और गैरकानूनी प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा मिलेगा। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून बिजनेस करने के अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(g)) के खिलाफ जा सकता है।

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