बरेली: अपनों की बेरुखी और मिनटों की दूरी, वृद्ध आश्रम में मौत का इंतज़ार कर रही हैं बूढ़ी आंखें
Sandesh Wahak Digital Desk: रिश्तों की कड़वाहट और आधुनिक समाज की संवेदनहीनता की एक मार्मिक तस्वीर बरेली के आंवला स्थित वृद्धाश्रम (Old Citizen Home) से सामने आई है। यहां 88 वर्षीय रणवीर सिंह पिछले 5 वर्षों से रह रहे हैं। विडंबना यह है कि उनका परिवार और उनके तीन संपन्न बेटे आश्रम से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर रहते हैं, लेकिन उनके पास अपने पिता के लिए चंद मिनट का समय भी नहीं है।

संपन्न परिवार, फिर भी बेघर
आंवला कोतवाली क्षेत्र के गांव चंपातपुर के निवासी रणवीर सिंह बताते हैं कि उनके तीन बेटे हैं, जो आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम हैं और अपना व्यवसाय चला रहे हैं। लेकिन बेटों की नफरत और पत्नी की बेरुखी ने उन्हें दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया। 5 साल पहले रणवीर सिंह गांव के ही एक बारात घर में भूखे-प्यासे और लावारिस हालत में पड़े मिले थे। तत्कालीन एसडीएम पारुल तरार ने उनकी दयनीय स्थिति देखकर उन्हें वृद्धाश्रम भिजवाया था।
“पत्नी ने भी साथ छोड़ दिया”
रणवीर सिंह अब चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं। वे अपनी चारपाई पर लेटे हुए शून्य को निहारते रहते हैं। भावुक होते हुए वे कहते हैं “बेटों की बेरुखी तो फिर भी समझ आती है, लेकिन पत्नी ने भी साथ छोड़ दिया, इस बात की गहरी चिंता रहती है।” उनकी बस एक ही अंतिम इच्छा है कि वे अपनी आखिरी सांस अपने परिवार के बीच लें।

डोरी सिंह: बेसहारा बुजुर्गों का सहारा
आंवला स्थित इस ओल्ड सिटीजन होम के प्रबंधक डोरी सिंह दशकों से ऐसे बुजुर्गों की सेवा कर रहे हैं। आश्रम में रणवीर सिंह जैसे दो दर्जन से अधिक बुजुर्ग रह रहे हैं, जिन्हें अपनों ने ठुकरा दिया है। शाहजहांपुर के खुशीराम, कस्बे के राधेश्याम, भूपराम शर्मा, बरेली शहर के हेमंत, और रामचरण जैसे कई लोग यहां अपनों की याद में दिन काट रहे हैं। डोरी सिंह बताते हैं कि वे शासन की मंशा के अनुरूप इन बुजुर्गों की देखभाल तो कर लेते हैं, लेकिन जब ये बुजुर्ग अपनों को याद कर रोते हैं, तो उन्हें ढांढस बंधाने के अलावा वे कुछ नहीं कर पाते।
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