बरेली का प्रशासनिक दंगल: अलंकार अग्निहोत्री जाएंगे कोर्ट, कहा- ‘मेरे खिलाफ रची गई बड़ी साजिश’

Sandesh Wahak Digital Desk: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर और सरकार पर गंभीर आरोप लगाकर चर्चा में आए पीसीएस (PCS) अफसर अलंकार अग्निहोत्री अब कानूनी लड़ाई की तैयारी में हैं। सोमवार देर रात शासन द्वारा निलंबित (Suspend) किए जाने के बाद अग्निहोत्री ने साफ कर दिया है कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाएंगे।

‘साजिश के तहत किया गया सस्पेंड’

मंगलवार सुबह मीडिया से बात करते हुए अलंकार अग्निहोत्री अपने स्टैंड पर कायम दिखे। उन्होंने रात के घटनाक्रम को लेकर प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने फिर दोहराया कि डीएम आवास पर उन्हें करीब 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। अग्निहोत्री का कहना है कि उन्हें रात भर बंधक रखने की योजना थी, लेकिन जब वह अपने इस्तीफे पर अड़े रहे और बात बाहर निकल गई, तो प्रशासन ने आनन-फानन में रात में ही सस्पेंशन लेटर जारी कर दिया। उन्होंने कहा, “भगवान का शुक्र है कि डीएम साहब का फोन स्पीकर पर था, जिससे मैंने लखनऊ से आए कॉल की सारी बातें और अपशब्द सुन लिए, वरना वे मुझे किसी और झूठे आरोप में फंसा सकते थे।”

डीएम ने आरोपों को बताया ‘भ्रामक’

दूसरी ओर, बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। डीएम ने कहा कि बंधक बनाने की बात पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक है। प्रशासन का कहना है कि अग्निहोत्री को केवल समझाने की कोशिश की जा रही थी।

सोमवार की पूरी रात अलंकार अग्निहोत्री के सरकारी आवास के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। वह कई बार गाड़ी में बैठकर निकले और वापस लौटे। उनके समर्थकों ने बताया कि वह सोने के लिए होटल तलाश रहे थे। रात 2 बजे जब वह वापस लौटे, तो क्षेत्राधिकारी (CO) पंकज श्रीवास्तव ने उन्हें टोकते हुए कहा कि बार-बार बिना सुरक्षा के अंदर-बाहर जाने से उनकी जान को खतरा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी पुलिस पर आएगी। अंत में, बार एसोसिएशन के सचिव दीपक पांडे के हस्तक्षेप के बाद वह रात में सरकारी आवास में ही रुकने को तैयार हुए। उनके सामान से लदे ट्रक अभी भी घर के बाहर खड़े हैं।

क्या है पूरा विवाद?

अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज माघ मेले में संतों के साथ हुई कथित अभद्रता और यूजीसी (UGC) के नए नियमों के विरोध में गणतंत्र दिवस के दिन इस्तीफा दिया था। उन्होंने सरकार को ‘भ्रमतंत्र’ बताते हुए गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद प्रशासन ने अनुशासनहीनता के आधार पर उन्हें निलंबित कर शामली अटैच कर दिया है।

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