हिंसा नहीं, अब विकास और गौरव है बस्तर की पहचान: पीएम मोदी
Sandesh Wahak Digital Desk: छत्तीसगढ़ का बस्तर, जिसका नाम सुनते ही कभी जेहन में माओवाद, हिंसा और पिछड़ेपन की तस्वीर उभरती थी, आज एक नई इबारत लिख रहा है। हिंसा के शोर को पीछे छोड़ अब बस्तर अपनी लोक कलाओं, परंपराओं और जनजातीय विरासत के आत्मविश्वास से देशभर को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। हाल ही में 7 से 9 फरवरी के बीच आयोजित हुए बस्तर पंडुम उत्सव ने इस बदलाव पर मुहर लगा दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भव्य आयोजन की सराहना करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने लिखा कि ‘बस्तर पंडुम’ के दौरान अंचल की समृद्ध जनजातीय विरासत का जो रूप दिखा, वह अद्भुत है। प्रधानमंत्री ने कहा, पहले बस्तर का नाम आते ही माओवाद और पिछड़ेपन की छवि बनती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आज बस्तर अपने विकास और स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जाता है। उन्होंने कामना की कि आने वाला समय यहाँ शांति और प्रगति का नया सवेरा लेकर आए।
नक्सलवाद से विकासवाद की यात्रा: अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद जगदलपुर पहुँचकर इस उत्सव की गरिमा बढ़ाई। उन्होंने इसे बस्तर के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ बताया। शाह ने कहा कि नक्सलियों ने जिस बस्तर को सदियों तक आईईडी और बारूद के अंधेरे में धकेला था, आज मोदी सरकार की नीतियों की वजह से वहां की कला, संस्कृति और खान-पान को वैश्विक पहचान मिल रही है।
गृह मंत्री ने जनजातीय भाई-बहनों से संवाद करते हुए कहा, बस्तर अब विकसित भारत का ब्रांड एंबेसडर बन रहा है। बस्तर पंडुम में हंसता-खेलता बस्तर इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि मजबूत इरादों से असंभव को भी संभव किया जा सकता है।
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