BCCI ने केलों पर खर्च कर दिए 35 लाख रुपये, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, गरमाया 12 करोड़ की गड़बड़ी का मामला

Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) पर एक बार फिर वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने BCCI को नोटिस जारी करते हुए 12 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं पर जवाब मांगा है।

याचिकाओं में दावा किया गया है कि खिलाड़ियों को केले खिलाने के नाम पर अकेले 35 लाख रुपये खर्च किए गए, जो अब विवाद की जड़ बन चुका है।

यह मामला क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (CAU) की 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर सामने आया है, जिसमें कई वित्तीय विसंगतियों की ओर इशारा किया गया है।

हाईकोर्ट में यह याचिका संजय रावत और अन्य द्वारा दाखिल की गई थी, जिसकी सुनवाई जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ कर रही है। अगली सुनवाई 19 सितंबर, शुक्रवार को निर्धारित है।

BCCI

क्या हैं आरोप?

रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि:

  • BCCI द्वारा उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन को दिए गए 12 करोड़ रुपये के फंड में गंभीर गड़बड़ियाँ की गईं।

  • 35 लाख रुपये केवल केले उपलब्ध कराने के नाम पर खर्च किए गए।

  • 6.4 करोड़ रुपये इवेंट मैनेजमेंट पर खर्च किए गए।

  • 26.3 करोड़ रुपये टूर्नामेंट और ट्रायल्स पर खर्च किए गए, जो कि पिछले वित्तीय वर्ष के 22.3 करोड़ से अधिक है।

  • खाने-पीने और अन्य सेवाओं के नाम पर मनमानी खर्च और फर्जी बिलिंग का आरोप लगाया गया है।

आडिट रिपोर्ट में मिलीं गंभीर अनियमितताएं

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की आंतरिक आडिट रिपोर्ट में इन खर्चों को “वित्तीय अनियमितता” और “अपारदर्शिता” करार दिया गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि खर्चों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है और कई भुगतान बिना प्रक्रिया के किए गए।

BCCI और उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड पर पहले भी उठे हैं सवाल

यह कोई पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड विवादों में आया हो:

  • 2022 में सामने आया था कि खिलाड़ियों को मात्र 100 रुपये प्रतिदिन दिए जा रहे थे, जो राज्य की न्यूनतम मजदूरी से भी कम था।

  • खिलाड़ियों ने बोर्ड पर मानसिक और शारीरिक शोषण के आरोप लगाए थे।

  • अधिकारियों की नियुक्तियों में पारदर्शिता की कमी और भाई-भतीजावाद के आरोप भी लगे।

वसीम जाफर विवाद भी बना था सुर्खियों में

2021 में, उत्तराखंड टीम के पूर्व कोच वसीम जाफर पर टीम मैनेजर नवीनत मिश्रा ने सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाया था।

मिश्रा ने कहा था कि जाफर मुस्लिम खिलाड़ियों का पक्ष ले रहे थे और ट्रेनिंग कैंप में मौलवियों को बुलाने का आरोप लगाया था।

इन आरोपों के बाद जाफर ने इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उन्होंने सभी आरोपों को बेबुनियाद और अपमानजनक बताया।

अब अदालत में होगा फैसला

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अब इस पूरे मामले में BCCI से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि खिलाड़ियों के लिए दिए गए फंड का उपयोग आखिर किस तरह किया गया, और क्या इन खर्चों को सही ठहराया जा सकता है?

इस मामले पर अब 19 सितंबर को अगली सुनवाई होगी, जहां BCCI को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।

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