सावधान! सस्ते ‘आर्टिफिशियल ग्रास’ के चक्कर में लग सकता है लाखों का चूना; लखनऊ पुलिस ने दबोचे 2 मास्टरमाइंड

Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ की साइबर क्राइम सेल और कृष्णानगर पुलिस को एक बड़ी अंतरराज्यीय कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने दिल्ली में छापेमारी कर दो ऐसे जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फर्जी बिजनेस फर्म बनाकर इंटीरियर डेकोरेशन का सामान बेचने के नाम पर देशभर में ठगी का जाल बिछा रखा था। इनके निशाने पर मुख्य रूप से वो लोग होते थे जो अपने घर या दफ्तर के लिए सजावटी सामान, जैसे कि सिंथेटिक घास (आर्टिफिशियल ग्रास) ढूंढ रहे होते थे।

कैसे शुरू हुई जांच: 1.65 लाख की ठगी से खुला राज

इस गिरोह का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि उसे सस्ते दाम पर ‘आर्टिफिशियल ग्रास’ उपलब्ध कराने का लालच दिया गया। ठगों ने उसे बाकायदा सामान का बिल और ट्रांसपोर्ट एजेंसी की फर्जी रसीद (बिल्टी) व्हाट्सएप पर भेजी। भरोसा होने पर पीड़ित ने एडवांस के तौर पर 1,65,000 रुपये उनके बताए खाते में जमा कर दिए। पैसे मिलते ही ठगों ने अपना फोन बंद कर लिया।

ठगी का ‘प्रोफेशनल’ तरीका: ऐप्स का करते थे इस्तेमाल

गिरफ्तार अभियुक्तों—मोहित जोशी (26 वर्ष) और गुलबीर (33 वर्ष)—ने पूछताछ में अपने काम करने के तरीके का खुलासा किया, जो किसी को भी हैरान कर सकता है:

जस्ट डायल से शिकार की तलाश: ये लोग ‘जस्ट डायल’ ऐप पर जाकर इंटीरियर डेकोरेशन डीलरों की प्रोफाइल सर्च करते थे।

फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल: फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर ये खुद को बहुत बड़ा व्यापारी बताते थे।

नकली इनवॉइस मेकर: ये शातिर ठग GST Invoice Manager, Transport Bilty Maker और Vyapar Invoice Maker जैसे मोबाइल ऐप्स का उपयोग कर हूबहू असली दिखने वाले फर्जी बिल और रसीदें तैयार करते थे।

म्यूल अकाउंट और गेमिंग वॉलेट: ठगी की रकम ये सीधे अपने खातों में नहीं, बल्कि ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के किराए के खाते) या ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स के वॉलेट में मंगाते थे, ताकि पुलिस की पकड़ में न आएं।

देशभर में फैला जाल: 11 राज्यों में दर्ज हैं शिकायतें

पुलिस ने जब इनके पास से मिले मोबाइल नंबरों को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर चेक किया, तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। इस गिरोह के खिलाफ पूरे भारत में 11 बड़ी शिकायतें दर्ज हैं। अब तक की जांच के अनुसार, ये लोग इसी तरीके से देशभर में लगभग 1 करोड़ रुपये की साइबर ठगी कर चुके हैं। लखनऊ पुलिस अब अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क कर इनके पुराने काले कारनामों का ब्यौरा जुटा रही है।

बरामदगी: ठगी का पूरा किट बरामद

दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके से पकड़े गए इन अभियुक्तों के पास से पुलिस ने बरामद किया है:

16 डेबिट/क्रेडिट कार्ड: जिनका इस्तेमाल पैसे निकालने के लिए होता था।

03 स्मार्टफोन: जिनसे फर्जी रसीदें और व्हाट्सएप अकाउंट संचालित होते थे।

05 सिम कार्ड: जो फर्जी आईडी पर लिए गए थे।

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