यूपी में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला, पूर्व विधायक, दो CMO पर करोड़ों के गबन का केस
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) अयोध्या सेक्टर ने करोड़ों रुपये के गबन के आरोप में समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव सहित कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में उनके पिता, गोंडा के दो तत्कालीन सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) और एक प्रधान सहायक भी आरोपी हैं।
क्या है पूरा मामला?
विजिलेंस की जांच में पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में सीएचसी हलधरमऊ और कटरा बाजार में मरम्मत और विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर बिना टेंडर के आरपी ग्रुप ऑफ कंस्ट्रक्शन को काम दिया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि आरपी ग्रुप का बैंक खाता पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव के पिता राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के नाम पर था। मुकेश श्रीवास्तव ने खुद इस खाते से ₹4 लाख से अधिक की राशि अपने निजी उपयोग के लिए ली। इस मामले में गोंडा के तत्कालीन सीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव और डॉ. आभा अशुतोष पर भी मिलीभगत का आरोप है।
गोंडा सीएमओ कार्यालय के प्रधान सहायक रामचंद्र सोनी पर निविदा से जुड़ी फाइल गायब करने का आरोप है।
पूर्व विधायक के भाई पर भी केस
जांच में यह भी सामने आया है कि पूर्व विधायक के भाई अजय कुमार श्रीवास्तव, जो स्वास्थ्य विभाग में क्लर्क हैं, ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। विजिलेंस ने उनके खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की है। जांच में पता चला कि अजय ने वैध स्रोतों से ₹46 लाख से ज्यादा कमाए, लेकिन उनकी चल-अचल संपत्तियों पर खर्च ₹4 करोड़ से अधिक था, जिसका वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
यह कार्रवाई पयागपुर से भाजपा विधायक सुभाष तिवारी की शिकायत के बाद की गई है। बता दें कि मुकेश श्रीवास्तव पहले भी बहुचर्चित एनआरएचएम (NRHM) घोटाले में जेल जा चुके हैं।

