यूपी में स्कूल पेयरिंग पर बड़ा फैसला: कोई स्कूल बंद नहीं होगा, शिक्षा मंत्री ने किया स्पष्ट
'पेयरिंग' से बदलेगा प्राथमिक शिक्षा का परिदृश्य, बंद नहीं होंगे विद्यालय, न कोई पद कम या समाप्त होगा: संदीप सिंह
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने आज लोक भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में स्कूल पेयरिंग (जोड़ीकरण) को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना है, न कि स्कूलों को बंद करना।
क्या है पेयरिंग पॉलिसी?
- पेयरिंग का मतलब है कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पास के बड़े स्कूलों से जोड़ना।
- कोई स्कूल स्थायी रूप से बंद नहीं होगा, न ही शिक्षकों की नौकरियां जाएंगी।
- पेयर किए गए स्कूलों के बीच अधिकतम दूरी 1 किलोमीटर रखी गई है।
- नदी, हाईवे या रेलवे क्रॉसिंग जैसी बाधाओं वाले स्कूलों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
क्यों की जा रही है पेयरिंग?
- मंत्री ने बताया कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में बच्चों को पूर्ण शैक्षिक अनुभव नहीं मिल पाता।
- पेयरिंग से शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर होगा।
- बच्चों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लासेज और खेल सुविधाएं मिलेंगी।
- 50 या उससे कम छात्रों वाले स्कूलों में 3 शिक्षक अनिवार्य किए जाएंगे।
रिक्त भवनों का क्या होगा?
- खाली होने वाले स्कूल भवनों में बालवाटिकाएं और आंगनबाड़ी केंद्र शुरू किए जाएंगे।
- 15 अगस्त तक कोई भी भवन खाली नहीं रहेगा।
शिक्षा सुधारों पर मंत्री का बयान
- पिछले वर्षों में 1.26 लाख नए शिक्षकों की भर्ती की गई।
- 96% सरकारी स्कूलों को “ऑपरेशन कायाकल्प” के तहत अपग्रेड किया गया।
- सभी छात्रों को यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे और ₹1200 की स्टेशनरी राशि DBT से दी जा रही है।
यूपी शिक्षा की उपलब्धियां
- ASER रिपोर्ट में छात्रों की पढ़ाई में सुधार दर्ज किया गया।
- ‘निपुण विद्यालय’ योजना के तहत 48,000+ स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाया गया।
मंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश का हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाए। पेयरिंग इसी दिशा में एक कदम है।”
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