बाफिल महाघोटाला: तीन आवास आयुक्तों ने की जांच पर कार्रवाई सिफर, दोषी अफसरों-कर्मियों को कौन बचा रहा?
Sandesh Wahak Digital Desk: बहुजन निर्बल वर्ग सहकारी गृह निर्माण समिति और द हिमालयन सहकारी आवास समिति से जुड़े सबसे बड़े भूखंड घोटाले पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ ढोंग जारी है। सीएम के आदेश पर गठित जांच की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने से अफसरों के हाथ कांप रहे हैं।

रसूखदारों ने भूखंड कौडिय़ों के भाव हथिया कर दिवंगत भूमाफिया दिलीप बाफिला के जरिये घोटाले की नींव रखी थी। गतवर्ष दिसंबर में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद घोटाले की विजिलेंस जांच शुरू नहीं हुई। सीएम के आदेश पर तीन-तीन आवास आयुक्तों ने जांच करके जो संस्तुतियां दी, वे भी कूड़े के ढेर में पड़ी हैं।

2020 में तत्कालीन प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार ने आवास आयुक्त की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठन की थी। 15 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट चार साल बाद शासन को मिली। अजय चौहान और रणवीर प्रसाद के तबादले के बाद वर्तमान आवास आयुक्त डॉ बलकार सिंह ने जांच में तेजी दिखाई। 27 मई 2024 को घोटाले की जांच रिपोर्ट के जरिये कमेटी ने संस्तुतियां शासन को सौंपी। जिसमें एलडीए से दोषी अफसरों-कर्मियों, समिति पदाधिकारियों और लाभार्थियों पर संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करके प्रभावी कार्यवाही करने को कहा गया।

बहुजन निर्बल वर्ग सहकारी समिति और द हिमालयन सहकारी आवास समिति ने किया फर्जीवाड़ा
पूर्व वीसी राजीव अग्रवाल व पीएन सिंह द्वारा की गयी विशेष टिप्पणियों पर तत्काल कार्यवाही करने के साथ ही उक्त योजनाओं का महालेखाकार(सीएजी) से वित्तीय एवं भूमि का विशिष्ट लेखा परीक्षण(ऑडिट) कराने की संस्तुति आवास आयुक्त वाली जांच कमेटी ने की। जिसके बाद पूर्व अपर मुख्य सचिव आवास नितिन गोकर्ण ने चार पत्र इस जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करने के संबंध में एलडीए भेजे थे। कार्रवाई नहीं हुई। दरअसल दोनों समितियों का पूरा फर्जीवाड़ा गोमतीनगर विस्तार में अंजाम दिया गया है। सीएजी से ऑडिट कराने पर एलडीए में वर्षों से जारी समायोजन घोटाले के बेनकाब होने का खतरा अफसरों को सताने लगा। इसी घोटाले ने एलडीए अफसरों को धनकुबेर बनाया है। नतीजतन सीएजी से ऑडिट पर वर्तमान में चुप्पी साधना ही बेहतर समझा गया।

रसूखदारों से जमीनें आज तक वापस नहीं, भटक रहे असली पीड़ित
सीएम योगी ने आवास आयुक्त से जांच इस मकसद से कराई थी कि घोटाले का सच सामने आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई और समिति के जिन सदस्यों का हक़ हड़पा गया। उनको न्याय मिलना संभव हो सकेगा। भ्रष्टाचार की कलंक कथा लिखने वाली दोनों समितियों ने जिन अफसरों-नेताओं को कौडिय़ों के भाव भूखंड देकर तमाम पीडि़तों का हक हड़पा है। ऐसे लोग आज भी भटकने को मजबूर हैं। वहीं जिन रसूखदार फर्जी सदस्यों को रेवडिय़ों की तर्ज पर प्लॉट दिए गए। उनसे जमीनें वापस लेने की पहल भी नहीं की जा रही है।
जांच के घेरे में दस वर्षों में तैनात रहे एलडीए वीसी-सचिव
एलडीए में 2009-2019 तक तैनात रहे वीसी व सचिव बाफिला गैंग के महाघोटाले के चलते जांच के घेरे में है। सैकड़ों भूखंडों का अवैध समायोजन किया गया है। लाखों वर्ग फुट जमीन वापस लेने की बजाय अफसरों ने प्लॉट के रूप में बिकवा दी। हिमालयन समिति ने तय सीमा साढ़े 12 एकड़ से करीब दोगुना से अधिक भूमि के एवज में एलडीए से मुआवजा लेकर सदस्यों को प्लाट देकर फर्जीवाड़ा किया है। लखनऊ के इस सबसे बड़े महाघोटाले की सीबीआई जांच बेहद जरुरी है।
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