बिहार मंत्रिमंडल पर ‘परिवारवाद’ का साया, दीपक प्रकाश बने मंत्री, RJD ने जारी की वंशवाद वाली लिस्ट
Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार में 20 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 10वीं बार शपथ लेने के साथ ही नए मंत्रिमंडल का गठन हो गया। इस गठन में 26 मंत्रियों ने शपथ ली, लेकिन सबसे चौंकाने वाला नाम उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का रहा। दीपक प्रकाश के विधायक या विधान परिषद सदस्य न होते हुए भी उन्हें मंत्री बनाए जाने पर विपक्ष ने परिवारवाद का आरोप लगाते हुए एनडीए पर निशाना साधा है।
विधायक न होते हुए भी मंत्री पद
कंप्यूटर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट दीपक प्रकाश (जन्म 1989) वर्तमान में विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। उन्हें मंत्री बने रहने के लिए छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होगा।
मंत्री बनाए जाने को लेकर जब दीपक प्रकाश से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें खुद भी शपथ ग्रहण से कुछ समय पहले ही पता चला था। उन्होंने कहा, “मेरा नाम क्यों तय किया गया? इस बारे में तो पापा ही बता पाएंगे।”
दीपक प्रकाश 2019-20 से सक्रिय राजनीति में हैं। उनकी माँ स्नेहलता कुशवाहा हाल ही में सासाराम विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बनी हैं।
कुशवाहा की ‘नाराज़गी’ दूर करने की कोशिश
राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि दीपक प्रकाश को सीधे मंत्रिमंडल में शामिल करना, विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी दूर करने का प्रयास हो सकता है। यह कदम यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में दीपक प्रकाश को एमएलसी (MLC) बनाया जा सकता है।
𝟏. मैं पूर्व मुख्यमंत्री व गया से सांसद और वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का पुत्र, वर्तमान विधायक ज्योति मांझी का दामाद और वर्तमान विधायक दीपा मांझी का पति संतोष सुमन मांझी!
𝟐. मैं पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी और पूर्व विधायक स्व॰ श्रीमती पार्वती देवी का उपमुख्यमंत्री…
— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) November 20, 2025
RJD का तीखा हमला
दीपक प्रकाश को मंत्री बनाने के बाद विपक्ष ने सत्तारूढ़ एनडीए पर तीखा हमला बोला है। आरजेडी (RJD) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए नीतीश सरकार के वंशवाद वाले मंत्रियों की एक लिस्ट जारी की है, जिसमें उपेंद्र कुशवाहा के अलावा जीतन राम मांझी, शकुनी चौधरी, दिग्विजय सिंह और कैप्टन जय नारायण निषाद जैसे नेताओं के परिवार के सदस्यों के नाम शामिल हैं। यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति में परिवारवाद के मुद्दे को एक बार फिर गरमा दिया है।
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