बिहार चुनाव: सहनी के दावों पर एनडीए का पलटवार

सन ऑफ मल्लाह को दावों पर भाजपा-जदयू की वक्र दृष्टि

Sandesh Wahak Digital Desk: आखिर राजद और कांग्रेस महागठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक मुकेश सहनी का एक दावा तो सच हो गया। महागठबंधन ने उन्हें डिप्टी सीएम पद का दावेदार भी घोषित कर दिया। अब देखना है कि उनके दूसरे दावे में कितना दम है। वह खुद  को सन ऑफ मल्लाह कहते हैं और इसी के चलते प्रदेश में मल्लाह जाति को महागठबंधन के साथ मानते हैं और मल्लाह जाति का पूरा वोट मिलने की बात भी कहते हैं। बिहार की राजनीति पूरी तरह जातीय गणित पर चलती है। ऐसे में एनडीए भी मल्लाहों को साधने की जोड़तोड़ में लगा है। उसने मुजफ्फरपुर के पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी को तिरहुत सीट से अपना उम्मीदवार भी बना दिया है।

आंकड़ों पर डालें नजर

अब जरा आंकड़ों पर नजर करें। 2023 की जाति जनगणना के अनुसार, बिहार की कुल आबादी  130725310  है। इसमें 2.6 प्रतिशत आबादी मल्लाहों की है। मल्लाहों में केवट, बिंद, निषाद, ढिमर, करबक और सहनी उपजातियां शामिल हैं। इन्हें पिछड़ा वर्ग के रूप में मान्यता प्राप्त है। हालांकि मल्लाह जाति पूरे बिहार में मौजूद है, लेकिन मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में इनका दबदबा है। इन इलाकों और इनके आसपास के क्षेत्रों में भूमिहार, राजपूर, कोइरी, कुर्मी और यादव जातियों को पीछे छोड़ते हुए राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली जाति के रूप में उभरी है। अब सहनी ने खुद को मल्लाहों का बेटा बताते हुए उनके वोट अपनी झोली में आने का दावा भी कर दिया। उनका ऐसा मानना है कि गंगा के तट पर बसे मल्लाह जाति के लोग उनका प्रत्याशी न होने पर भी महाठबंधन को ही वोट देंगे। उनका यह भी दावा है कि उन्हें मल्लाहों के साथ अन्य समुदायों का भी समर्थन प्राप्त है। खुद को सन ऑफ मल्लाह कह देने से जाहिर है कि उनका यह दावा सच्चाई से कोसों दूर है।

2020 में 11 में 4 सीटें मिली थीं वीआईपी को

2020 में सहनी ने भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यू के साथ मिल कर विस चुनाव लड़ा था, जिसमें 11 सीटों में उसे चार सीटें मिली थीं। इसमें उसका जातीय वोट प्रतिशत 1.52 रहा। बाद में 2023 में इस चार विधायकों में से तीन ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली और 2021 में बोचहा (मुजफ्फरपुर) सीट विधायक के निधन के बाद रिक्त हो गई थी। उपचुनाव में इस सीट पर राजद प्रत्याशी को जीत हासि हुई थी। मौजूदा समय में सहनी की वीआईपी का एक भी विधायक सदन में नहीं है।

एनडीए भी जुटा व्यूह रचना में

अब बात करे एनडीए गठबंधन की तो मुजफ्फपुर से भाजपा सांसद डॉ. राजभूषण निषाद केंद्र में मंत्री हैं तो मल्लाहों में खासी पकड़ रखने वाले कैप्टेन निषाद की पुत्रवधू (अजय निषाद की पत्नी) को मैदान में उतारा है। जाहिर है कि ये दोनों तिरहुत व अन्य क्षेत्रों में मुकेश सहनी को टक्कर देंगे। यही नहीं मौजूद समय में भाजपा से विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी डिप्टी सीएम हैं। इसमें विजय भूमिहार और सम्राट कोइरी समुदाय से हैं। यही नहीं सीएम नीतीश कुमार स्वयं कुर्मी समुदाय से हैं। ऐसे में इस तिकड़ी को अगड़ा-पिछड़ा-अत्यंत पिछड़ा की तिगड़ी कहा जाए तो अतिश्योक्ति न होगी। ऐसे में मुकेश सहनी का दावा कहां तक सच होगा ये तो वक्त बताएगा।

रिपोर्ट: राज कृष्ण पाण्डेय 

 

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