बिहार वोटर लिस्ट विवाद, चुनाव आयोग ने दिया सुधार का मौका, 1 अगस्त से कर सकेंगे शिकायत

Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का पहला चरण अब खत्म होने वाला है। इस बीच, विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि सरकार जानबूझकर वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटा रही है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए साफ कहा है कि किसी भी योग्य वोटर का नाम लिस्ट से नहीं हटेगा।

गलतियां सुधारने का मिलेगा मौका

इसी कड़ी में भारत निर्वाचन आयोग ने एक अहम ऐलान किया है। आयोग ने बताया कि 1 अगस्त से 1 सितंबर तक मतदाताओं या किसी भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल को अपनी शिकायत दर्ज कराने का मौका मिलेगा। इस दौरान, अगर बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) या बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) से कोई गलती हुई हो, जैसे किसी योग्य मतदाता का नाम छूट गया हो या किसी अयोग्य व्यक्ति का नाम जुड़ गया हो, तो उसकी जानकारी देकर सुधार कराया जा सकेगा।

यह व्यवस्था SIR आदेश के पेज 3, पैरा 7(5) के तहत लागू होगी। इसका मतलब है कि वोटर लिस्ट से बाहर हुए लोगों के पास अपना नाम फिर से जुड़वाने के लिए पूरे एक महीने का समय रहेगा।

अब तक का काम और आंकड़े

भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 99% मतदाताओं को कवर किया जा चुका है। इस प्रक्रिया में 20 लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई है जिनकी मौत हो चुकी है, 28 लाख स्थायी प्रवासी मतदाता (जो कहीं और जा चुके हैं) और 7 लाख से ज़्यादा ऐसे नाम हैं जो दो बार दर्ज थे। क़रीब 1 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनका कोई अता-पता नहीं चल पाया है, जबकि 15 लाख से ज़्यादा मतदाताओं ने अभी तक फॉर्म नहीं भरा है। कुल 7.17 करोड़ मतदाताओं (90.89%) के फॉर्म मिल चुके हैं और उन्हें डिजिटाइज़ भी किया जा चुका है।

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