‘भाजपा तो गई’, अखिलेश यादव ने बीजेपी की हार पर कसा तंज
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में हुए महमूदाबाद नगर पालिका अध्यक्ष पद के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। चुनाव में सपा प्रत्याशी आमिर अरफात ने 8,906 वोट पाकर शानदार जीत हासिल की, जबकि भाजपा के उम्मीदवार महज 1,352 वोटों पर सिमट कर पाँचवें स्थान पर रहे। इस हार से भाजपा प्रत्याशी की जमानत भी जब्त हो गई।
सीतापुर के महमूदाबाद नगर पालिका चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत मनोबल को बढ़ानेवाली है। भाजपा का 5 वें नंबर पर आना उप्र की भविष्य की राजनीति का सूचक है।
विजयी उम्मीदवार सहित समस्त पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई और अच्छा काम करने के लिए शुभकामनाएँ!
भाजपा गयी!
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 13, 2025
अखिलेश यादव ने जीत पर कसा तंज
इस नतीजे के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर भाजपा पर तंज कसते हुए कहा, “सीतापुर के महमूदाबाद नगर पालिका चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत मनोबल बढ़ाने वाली है और भाजपा का 5वें नंबर पर आना यूपी की भविष्य की राजनीति का सूचक है। भाजपा तो गई।”
यह हार भाजपा के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है, खासकर तब जब चुनाव प्रचार में कई मंत्री और वरिष्ठ नेता सक्रिय थे। इसके बावजूद, भाजपा का प्रदर्शन निर्दलीय और यहाँ तक कि कांग्रेस के उम्मीदवारों से भी खराब रहा।
टिकट बंटवारे में असंतोष बनी हार की वजह
महमूदाबाद सीट पर भाजपा की हार के पीछे टिकट वितरण में हुई गड़बड़ी को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। पार्टी ने पूर्व सांसद राजेश वर्मा के करीबी संजय वर्मा को टिकट दिया, जिससे नाराज होकर कई पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं ने बगावत कर दी। दो बागी उम्मीदवार, अतुल वर्मा और अमरीश गुप्ता, निर्दलीय चुनाव लड़े और वे क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे, जो भाजपा के आधिकारिक प्रत्याशी से कहीं आगे थे।
मिश्रिख में भाजपा ने दर्ज की जीत, नैमिषारण्य सीट पर कायम रहा कब्जा
महमूदाबाद में हार के बावजूद, भाजपा को मिश्रिख नगर पालिका अध्यक्ष पद के उपचुनाव में जीत मिली है। यहाँ भाजपा की प्रत्याशी सीमा भार्गव ने लगभग 3,200 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। मिश्रिख सीट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इसमें धार्मिक स्थल नैमिषारण्य भी शामिल है। यह जीत भाजपा के लिए एक बड़ी राहत है, जो अयोध्या लोकसभा चुनाव में हार के बाद इस प्रतिष्ठित सीट को खोना नहीं चाहती थी।
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