शरजील और उमर को जमानत न मिलने पर BJP की तीखी प्रतिक्रिया, Chicken Neck की बात करने का आरोप
Sandesh Wahak Digital Desk: साल 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 5 जनवरी को इन दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है और भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है और जो लोग भारत के ‘चिकन नेक’ को काटने की बात कर रहे थे, अब उनकी गर्दन कानून के दायरे में फंस गई है। आरपी सिंह ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि ऐसे लोगों को अब अपनी गर्दन बचाने पर ध्यान देना चाहिए।
शरजील इमाम पर आरोप है कि उन्होंने भारत के ‘चिकन नेक’ को काटने की बात की थी। शरजील को लेकर यह दावा किया गया था कि उन्होंने अपने एक भाषण में सिलीगुड़ी कॉरिडोर को ब्लॉक करने की बात कही थी। इस बयान को लेकर वह पहले से ही विवादों में रहे हैं और अब जमानत खारिज होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
SC rejects bail of Umar Khalid & Sharjeel Imam:
Those who spoke of cutting the India’s “chicken neck” now find their own neck firmly within the framework of law. pic.twitter.com/z2L0ud6HtG— RP Singh National Spokesperson BJP (@rpsinghkhalsa) January 5, 2026
अन्य आरोपियों को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले में कहा है कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने इस केस में अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी है।
दिल्ली दंगों की साजिश का आरोप
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की साजिश रचने का आरोप है। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिक पंजी के खिलाफ चल रहे व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था।
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