‘वंदे मातरम पर ज्ञान न दे भाजपा, पहले देश से माफी मांगे’, आराधना मिश्रा ‘मोना’ का तीखा प्रहार
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने ‘वंदे मातरम’ और बिजली विभाग के ‘स्मार्ट मीटर’ मुद्दे पर योगी सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने भाजपा पर इतिहास से छेड़छाड़ और उपभोक्ताओं के शोषण का गंभीर आरोप लगाया।

‘भाजपा की दोहरी मानसिकता और ऐतिहासिक झूठ’
वंदे मातरम पर हो रही चर्चा के दौरान आराधना मिश्रा ने भाजपा और आरएसएस के राष्ट्रवाद पर सवाल उठाए। ‘मोना’ ने याद दिलाया कि वंदे मातरम पहली बार कांग्रेस के अधिवेशन में ही गाया गया था। 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने नेहरू, पटेल, सुभाष चंद्र बोस और मौलाना आजाद की मौजूदगी में इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने भाजपा के इस दावे को झूठा बताया कि 100 साल पर कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “30 दिसंबर 1976 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वंदे मातरम के शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट जारी किया था।”
कांग्रेस नेता ने भाजपा को याद दिलाया कि 1998 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने जब इसे अनिवार्य किया था, तो भारी विरोध के बाद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दखल पर इसे वापस लेना पड़ा था और शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करना पड़ा था। भाजपा को पहले उस पर माफी मांगनी चाहिए।
स्मार्ट मीटर: “उपभोक्ताओं से अवैध वसूली और निजीकरण की साजिश”
आराधना मिश्रा ने नियम 56 के अंतर्गत बिजली विभाग में हो रही धांधली का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर जो दाम वसूले जा रहे हैं, उसके लिए विद्युत नियामक आयोग से अनुमति नहीं ली गई है। बिना उपभोक्ता की सहमति के मीटर लगाना ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम’ का उल्लंघन है। 2018 में 959 करोड़ की लागत से 12.04 लाख 2G मीटर लगाए गए। अब उन्हें हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने पर फिर से 681 करोड़ खर्च हो रहे हैं। ‘मोना’ ने सवाल किया कि इस बर्बादी का भुगतान जनता क्यों करे? उन्होंने कहा कि दिहाड़ी मजदूर के लिए प्रीपेड व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। मजदूर पहले परिवार का पेट भरे या बिजली का मीटर रिचार्ज करे? यह सब निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का खेल है।
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