6,000 करोड़ के पार पहुंचा बीजेपी का खजाना, जानिए किन कंपनियों ने दिया सबसे ज्यादा चंदा
Sandesh Wahak Digital Desk: इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के रद्द होने का भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आर्थिक सेहत पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है। वर्ष 2024-25 के लिए चुनाव आयोग को सौंपी गई वार्षिक कॉन्ट्रिब्यूशन रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी को इस वित्त वर्ष में कुल ₹6,088 करोड़ का चंदा प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष (₹3,967 करोड़) की तुलना में 53% अधिक है और पिछले 6 वर्षों में पार्टी के लिए चंदे का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
विपक्ष के मुकाबले बीजेपी का भारी पलड़ा
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी को मिला चंदा पूरे विपक्ष के कुल योग से भी कई गुना ज्यादा है:
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बीजेपी: ₹6,088 करोड़
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कांग्रेस: ₹522.13 करोड़ (बीजेपी को कांग्रेस से 12 गुना ज्यादा चंदा मिला)
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कुल मुख्य विपक्षी दल: ₹1,343 करोड़ (बीजेपी का चंदा संयुक्त विपक्ष से भी लगभग 4.5 गुना अधिक है)
इलेक्टोरल ट्रस्ट बना चंदे का मुख्य स्रोत
इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद बीजेपी ने वैकल्पिक माध्यमों से रिकॉर्ड फंड जुटाया:
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इलेक्टोरल ट्रस्ट: पार्टी को कुल चंदे का 61% हिस्सा (₹3,744 करोड़) विभिन्न इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से मिला।
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कॉरपोरेट व अन्य: शेष ₹2,344 करोड़ बड़े कॉरपोरेट घरानों और व्यक्तिगत दानदाताओं से चेक, डिमांड ड्राफ्ट या बैंक ट्रांसफर के जरिए आए।
टॉप दानदाता कंपनियां (2024-25)
बीजेपी को सबसे ज्यादा चंदा देने वाली शीर्ष कंपनियों की सूची इस प्रकार है:
| कंपनी / व्यक्ति | चंदा (₹ करोड़ में) |
| सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) | 100 |
| रुंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड | 95 |
| वेदांता लिमिटेड | 67 |
| मैक्रोटेक डेवलपर्स लिमिटेड | 65 |
| डिराइव इन्वेस्टमेंट्स | 53 |
| आईटीसी लिमिटेड (ग्रुप सहित) | 72.5 |
चुनावी चंदे के नियम
नियमानुसार, राजनीतिक दलों को ₹20,000 से अधिक के प्रत्येक चंदे की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है। इलेक्टोरल बॉन्ड योजना (2017-2024) के तहत ₹16,000 करोड़ से अधिक का गुमनाम चंदा जुटाया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। अब सभी चंदे पारदर्शी माध्यमों (चेक/डिजिटल) से लिए जा रहे हैं।
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