बोर्ड परीक्षा: बड़ी लापरवाही, 700 परीक्षार्थियों के आवेदन निरस्त, कुशीनगर में परीक्षा से हुए वंचित छात्र
गोस्वामी तुलसी दास इंटर कालेज स्थित पत्राचार पंजीकरण केन्द्र संख्या 901 में हुई लापरवाही
पडरौना, कुशीनगर। माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित यूपी बोर्ड की परीक्षा में कुशीनगर में बड़े स्तर पर मनमानी, लापरवाही उजागर हुई है। नतीजा बोर्ड ने इन 700 परीक्षार्थियों के न सिर्फ अनुक्रंमाक विलोपित करने बल्कि प्रवेश पत्र भी निरस्त कर लाचार परीक्षार्थियों को परीक्षा से वंचित करने का फरमान जारी कर दिया है। जिससे हड़कंप मचा हुआ है।
जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार ने अनुसार कुशीनगर में पत्राचार पंजीकरण केन्द्र के रूप में नामित गोस्वामी तुलसीदास इण्टर कॉलेज, पडरौना के माध्यम से इण्टरमीडिएट परीक्षा वर्ष 2026 के लिए कुल 700 विद्यार्थियों का पंजीकरण प्रस्तावित था। जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया कि पत्राचार पाठ्यक्रम के अंतर्गत पंजीकरण वर्ष 2024 में निर्धारित समयावधि के भीतर पंजीकरण नहीं कराया गया, शुल्क 20 सितम्बर 2024 तक जमा नहीं किया गया तथा आवेदन पत्रों को आवश्यक अभिलेखों एवं अर्हता प्रमाण-पत्रों सहित पूर्ण रूप से पूरित नहीं किया गया। कई आवेदन पत्रों में आवश्यक विवरण अंकित नहीं पाए गए तथा एक वर्षीय/द्विवर्षीय पाठ्यक्रम से संबंधित अनिवार्य प्रमाण-पत्र भी संलग्न नहीं संल्ग्न किये गये थे।
अनियमितता जालसाजी का मामला
इसके अतिरिक्त अनुसरण प्रमाण-पत्रों पर नामित नोडल अधिकारी विकास मणि त्रिपाठी प्रधानाचार्य, पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय इण्टर कालेज के स्थान पर तुलसी दास इंटर कालेज के प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक ने नियम विरुद्ध रूप से हस्ताक्षर किए थे। साथ ही पत्राचार शिक्षा संस्थान, प्रयागराज से विधिवत अनुमति प्राप्त किए बिना गत वर्षों के क्रमांकों का उपयोग किया जाना प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता जालसाजी का मामला प्रतीत हुआ।
उक्त अनियमितताओं के संबंध में सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद, उ०प्र०, प्रयागराज ने पत्राचार पंजीकरण केन्द्र संख्या 901 के अंतर्गत पंजीकृत सभी 700 परीक्षार्थियों के आवेदन पत्र निरस्त करते हुए आवंटित अनुक्रमांकों को फ्रीज व विलोपित करने का निर्देश जारी कर दिया है।
सचिव ने की कार्यवाही की संस्तुति
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव ने क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर की जांच आख्या के आधार पर सभी 700 परीक्षार्थियों के अनुक्रमांक विलोपित करने के लिए निर्देशित कर संबंधित परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा पर रोक लगाने के फरमान जारी किये हैं। जांच आख्या के आधार पर प्रकरण परीक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत कर पंजीकरण केन्द्र के विरुद्ध निर्णय लेने के लिए निर्देशित किया है।
नोडल अधिकारी एवं संबंधित लिपिक के विरुद्ध होगी कार्रवाई
सचिव ने इस लापरवाही के लिए पत्राचार के नोडल अधिकारी व केंद्र के लिपिक के विरूद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया है। साथ ही कहा है कि यह परीक्षण किया जाए कि प्रकरण उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 की धारा-2(च) एवं धारा-14 से आच्छादित है या नहीं।
जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार ने बताया कि ज्ञान प्रकाश पाठक, प्रधान लिपिक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए संस्था प्रबंधक को निर्देशित किया जा चुका है तथा उन्हें परिषदीय बोर्ड परीक्षा कार्यों से पृथक कर दिया गया है। विकास मणि त्रिपाठी, प्रधानाचार्य के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र प्रेषित किया जा चुका है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने स्पष्ट किया कि बोर्ड परीक्षा की सुुचिता एवं पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
उच्च न्यायालय से भी नहीं मिली राहत
700 परीक्षार्थियों के संबंध में उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की गई है। 17 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय द्वारा कोई अंतरिम राहत प्रदान नहीं की गई तथा 04 सप्ताह के भीतर शपथ-पत्र दाखिल किए जाने का आदेश पारित किया है।
रिपोर्ट: राघवेन्द्र मल्ल
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