Lucknow News: अमित शाह के विरोध में बसपा का जोरदार प्रदर्शन, हजरतगंज चौराहे जमा हुए सैकड़ों कार्यकर्ता
Sandesh Wahak Digital Desk: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के डॉ. भीमराव आंबेडकर पर दिए गए बयान के बाद बसपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। जहां बसपा इसे दलित सम्मान से जोड़कर सरकार पर दबाव बना रही है, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल विपक्ष के बयानों को राजनीतिक दिखावा बता रहे हैं।

इसी कड़ी में बहुजन समाज पार्टी के नेताओं ने इसे लेकर विरोध तेज कर दिया है। ऐसे में बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

मंगलवार को आकाश आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “करोड़ों शोषितों, वंचितों और गरीबों के लिए बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर भगवान जैसे हैं। लेकिन वोटों के लिए उनके नाम का इस्तेमाल करना आजकल एक फैशन बन गया है।”

तो वहीं इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा अमित शाह द्वारा संसद में परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का अनादर किए जाने को लेकर देश भर में लोगों में भारी आक्रोश है, लेकिन बाबासाहेब उपेक्षा व देशहित में उनके संघर्ष को हमेशा आघात पहुंचाने वाली कांग्रेस का इसको लेकर उतावलापन विशुद्ध छलावा व स्वार्थ की राजनीति है।

अमित शाह का बयान
दरअसल बीते 17 दिसंबर को राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण में कहा था, “अभी एक फ़ैशन हो गया है… आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर। इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।” इसके बाद उन्होंने अंबेडकर के नेहरू कैबिनेट से इस्तीफे और उनके विचारों पर भी बात की।
अमित शाह ने कहा, “डॉ. अंबेडकर ने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रति सरकार के रवैये से असंतुष्ट होकर इस्तीफा दिया था। उन्होंने अनुच्छेद 370 और विदेश नीति से भी असहमति जताई थी।” शाह ने जवाहरलाल नेहरू के एक पत्र का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि नेहरू ने अंबेडकर के इस्तीफे को मंत्रिमंडल के लिए नुकसानदायक नहीं माना।
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